श्री अमरनाथ यात्रा 2026: लंगर आवेदन की पुरानी नीति हटाने पर विवाद, SABLO ने कहा- ‘नई प्रणाली में पारदर्शिता की कमी’

श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन (SABLO) ने 2026 की श्री अमरनाथ यात्रा के लिए लंगर आवेदन की नई प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने पारदर्शिता की कमी बताते हुए चयन के मापदंडों को सार्वजनिक करने और पुरानी प्रक्रिया बहाल करने की मांग की है।

इस साल की श्री बाबा अमरनाथ यात्रा के दौरान लंगर लगाने की आवेदन प्रक्रिया शुरु हो गई है लेकिन श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन (SABLO) ने नई चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

संगठन ने इस प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां जताते हुए पारदर्शिता और स्पष्टता की मांग की है। संगठन ने श्राइन बोर्ड से चयन के मापदंडों और मूल्यांकन प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह स्पष्ट किया जाए कि चयन में अनुभव, सेवा रिकॉर्ड, क्षमता और अन्य कारकों को किस तरह शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही संगठन ने पहले से चली आ रही प्रक्रिया को बंद करने पर भी सवाल उठाए हैं।

संगठन के अनुसार, पहले ऑफर इनवाइटिंग लेटर के जरिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगाए जाते थे और एनओसी जारी की जाती थी, जो अब बंद कर दी गई है। इसे बिना पर्याप्त कारण के बदलना उचित नहीं है। संगठन के प्रधान राजन गुप्ता व अन्य पदाधिकारियों ने मांग की है कि अनुभवी संस्थाओं के साथ निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।

मौजूदा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी

संगठन का यह भी कहना है कि मौजूदा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है, इसलिए इसे तुरंत वापस लेकर पुरानी स्थापित प्रक्रिया को ही जारी रखा जाए।

संगठन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए श्राइन बोर्ड से तत्काल जवाब देने और पत्र की प्राप्ति की पुष्टि करने का आग्रह किया है। इसके अलावा संगठन ने श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से अनुरोध किया है कि संगठन के अधिकृत प्रतिनिधियों को जल्द से जल्द व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया जाए, ताकि इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा कर समाधान निकाला जा सके।

संगठन ने पत्र की कापी देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, देश के मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा में विपक्ष के नेता, जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल जो बोर्ड के चेयरमैन भी हैं को भेजी हैं।

बाबा अमरनाथ यात्रा का आंकड़ा

पिछले 12 वर्ष के यात्रा के आंकड़े

वर्ष दर्शन

  • 2011 6.34 लाख
  • 2012 6.22 लाख
  • 2013 3.53 लाख
  • 2014 3.73 लाख
  • 2015 3.52 लाख
  • 2016 2.20 लाख
  • 2017 2.60 लाख
  • 2018 2.85 लाख
  • 2019 3.42 लाख
  • 2020 कोरोना के कारण यात्रा नहीं हुई
  • 2021 कोरोना के कारण यात्रा नहीं हुई
  • 2022 3.04 लाख
  • 2023 4.50 लाख
  • 2024 5.10 लाख
  • 2025 4.14 लाख

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