
श्रीनगर। पूर्व हुर्रियत कान्फ्रेंस नेता बिलाल गनी लोन ने उत्तर कश्मीर के हंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की रैली आयोजित कर मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय रूप से आने का संकेत दिया।
इस कदम के साथ उन्होंने अपने दिवंगत पिता अब्दुल गनी लोन की राजनीतिक विरासत पर अपना दावा भी जताया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बिलाल लोन के आने से लोन परिवार की राजनीति में नया अध्याय शुरू हो सकता है।
साथ ही, इससे उनके छोटे भाई और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष तथा हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद गनी लोन के लिए राजनीतिक चुनौती भी खड़ी होने की संभावना है। कुपवाड़ा जिले के दर्द हरि गांव में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए बिलाल लोन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियां बदल चुकी हैं और नई राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप आगे बढ़ना समय की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि बदलते हालात का मतलब यह नहीं है कि लोगों के हितों की रक्षा के प्रयास छोड़ दिए जाएं। उन्होंने अपने पिता अब्दुल गनी लोन की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पिता जनता के सच्चे नेता थे, जिन्होंने हमेशा अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज उनके पिता की विरासत को धूमिल किया जा रहा है और वह ऐसा नहीं होने देंगे।
बिलाल लोन ने कहा कि यदि उनका उद्देश्य जनता के व्यापक हित हों तो राजनीतिक बदलावों को संदेह या उपहास की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए । उन्होंने विभिन्न विचारधाराओं के नेताओं से मतभेद भुलाकर जम्मू-कश्मीर के भविष्य के लिए साझा रोडमैप तैयार करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है। समाज के हर जिम्मेदार व्यक्ति की इस प्रक्रिया में भूमिका है ताकि आने वाली पीढ़ियां सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जी सकें।’
अपने संबोधन में बिलाल लोन ने अप्रत्यक्ष रूप से अपने भाई सज्जाद लोन पर निशाना साधते हुए कहा कि डराने, अपशब्दों और विभाजनकारी राजनीति से केवल जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन नेताओं का असली उद्देश्य समाज को मजबूत बनाना और लोगों के भविष्य को बेहतर करना होना चाहिए।
उन्होंने लोगों से अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से चुनावी वादों का हिसाब मांगने की अपील की और भरोसा दिलाया कि वह स्थानीय समस्याओं को संबंधित अधिकारियों के समक्ष लगातार उठाते रहेंगे।
बिलाल लोन ने कहा कि वह खुद को कोई बड़ा राजनीतिक नेता या नैतिक अधिकार वाला व्यक्ति नहीं मानते, बल्कि एक आम नागरिक के रूप में लोगों के बीच आए हैं ताकि उनकी समस्याओं को सुन सकें और उनके साथ मिलकर समाधान की दिशा में काम कर सकें।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में रोजगार के नए अवसर पैदा करना, शिक्षित युवाओं और उद्यमियों को प्रोत्साहन देना, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना तथा गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की बेहतरी सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष जुलाई में बिलाल लोन ने हुर्रियत कान्फ्रेंस को गैर-कार्यात्मक बताते हुए उसकी प्रासंगिकता खत्म होने के लिए उसे ही जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने पाकिस्तान की भी आलोचना करते हुए कहा था कि उसने जम्मू-कश्मीर में अव्यवस्था और दरारें पैदा की हैं।
बिलाल लोन की मुख्यधारा की राजनीति में आने को कश्मीर की बदलती राजनीतिक तस्वीर का हिस्सा माना जा रहा है, जहां हाल के वर्षों में कई पूर्व अलगाववादी नेता लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए राजनीतिक भागीदारी का रास्ता अपना चुके हैं।
