अब लद्दाख से भी तय होगी अमरनाथ यात्रा, 6 KM का बनेगा तीसरा रास्ता; सिर्फ एक दिन में हो सकेंगे दर्शन

श्रीनगर। श्री अमरनाथ धाम तक श्रद्धालुओं की पहुंच और सुलभ बनाने के लिए तीसरा मार्ग तैयार करने की संभावनाओं पर काम शुरू हो चुका है। यह प्रस्तावित मार्ग लद्दाख प्रदेश के मीनामर्ग को कश्मीर घाटी में समुद्रतल से लगभग 12,756 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्रीअमरनाथ की पवित्र गुफा को जोड़ेगा। यह छोटा मार्ग करीब छह किलोमीटर का होगा। मौजूदा समय में पवित्र गुफा तक पहुंचने के दो मार्ग बालटाल और पहलगाम हैं।

बालटाल से पवित्र गुफा 14 किलोमीटर है। यह मार्ग वर्ष 1999 को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था। वहीं, पहलगाम मार्ग से पवित्र गुफा की दूरी लगभग 34 किलोमीटर है। लद्दाख से पवित्र गुफा तक एक वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की मांग काफी पुरानी है। गत जून को लद्दाख में सिंधु महाकुंभ में इस मार्ग को तैयार करने की मांग फिर उठी।

लेह स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद के पूर्व मुख्य कार्यकारी पार्षद ताशी ग्यालसन ने अपने संबोधन में इसकी तरफ ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, लद्दाख प्रशासन को केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ इस मामले को उठाते हुए गुफा के लिए तीसरा मार्ग तैयार करने की दिशा में काम करना चाहिए। इस मार्ग से श्रद्धालु एक ही दिन में पवित्र गुफा तक की यात्रा कर सकेंगे। लद्दाख घूमने आए पर्यटक भी पवित्र गुफा के दर्शन कर सकेंगे।

हिमाचल प्रदेश की तरफ से आने वाले श्रद्धालु लेह, जंस्कार के रास्ते पवित्र गुफा तक जा सकेंगे। लद्दाख मार्ग शुरू होने पर यात्रियों का दबाव तीन मार्गों में विभाजित किया जा सकेगा।

प्रस्ताव की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही

लद्दाख के संबंधित अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित मार्ग निर्माणाधीन जोजिला सुरंग के पूर्वी मुहाने (मीनामर्ग-द्रास) से पवित्र गुफा तक होगा और इसकी लंबाई लगभग छह किलोमीटर होगी। उन्होंने बताया कि लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना भी इस प्रस्ताव को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और उन्होंने इस प्रस्ताव को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। सीमा सड़क संगठन से भी चर्चा की जा रही है।

…तब सर्दियों में ही भी खुला रहेगा यह

मार्ग अधिकारियों ने बताया कि निर्माणाधीन जोजिला सुरंग जब बनकर तैयार होगी तो वह लद्दाख-कश्मीर के बीच एक सदाबहार सड़क संपर्क सुनिश्चित करेगी। ऐसी स्थिति में मीनामर्ग से पवित्र गुफा तक का मार्ग सर्दियों में ही खुला रहेगा।

इस मार्ग की भौगोलिक परिस्थितियां मौजूदा बालटाल और पहलगाम मार्ग की अपेक्षा ज्यादा अनुकूल हैं। इस क्षेत्र में घाटियां चौड़ी और अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं, जिससे श्रद्धालओं के लिए विभिन्न सुविधाएं तैयार करने के लिए पर्याप्त व सुरक्षित स्थान उपलब्ध होगा।

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