
श्रीनगर। कश्मीरी अलगाववादी नेता और प्रतिबंधित संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत (DeM) की प्रमुख आसिया अंद्राबी ने उम्रकैद की सजा के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की है। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
हाई कोर्ट ने अंद्राबी के साथ ही इस मामले में दोषी करार दी गई उनकी दो सहयोगियों- सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन की अपीलों पर भी NIA से जवाब तलब किया है। साथ ही ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगाने की मांग पर भी एजेंसी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
यह मामला 2018 में एनआईए द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा है। एनआईए ने आरोप लगाया था कि अंद्राबी और उनकी सहयोगी दुख्तरान-ए-मिल्लत के बैनर तले जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए साजिश रच रही थीं।
जांच एजेंसी ने ट्रायल के दौरान सबूत के तौर पर कई वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट पेश किए थे, जिनमें कथित तौर पर आतंकी बुरहान वानी की प्रशंसा, पत्थरबाजी को बढ़ावा देना और पाकिस्तान के समर्थन वाले बयान शामिल थे। एजेंसी का आरोप था कि ये संगठन ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब और पाकिस्तानी टीवी चैनलों के जरिए ‘भारत के खिलाफ विद्रोही और नफरत भरे संदेश’ फैला रहा था।
ट्रायल कोर्ट ने क्या कहा था?
कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने 14 जनवरी 2026 को तीनों को दोषी करार दिया था। उन्हें UAPA की धारा 20, 38, 39 और IPC की धारा 153A, 153B, 120B, 505 और 121A के तहत दोषी ठहराया गया था।
24 मार्च 2026 को सजा सुनाते हुए अदालत ने आसिया अंद्राबी को उम्रकैद और सोफी फहमीदा व नाहिदा नसरीन को 30-30 साल कैद की सजा सुनाई।
सजा के दौरान NIA ने अदालत से अंद्राबी के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी। एजेंसी ने कहा था कि उन्होंने भारत के खिलाफ जंग छेड़ी है और कड़ी सजा देकर यह संदेश देना जरूरी है कि राज्य के खिलाफ साजिश पर सख्त कार्रवाई होगी।
दोषी अच्छी पढ़ी-लिखी महिलाएं हैं
NIA ने अपनी दलील में कहा था- ‘दोषी अच्छी पढ़ी-लिखी महिलाएं हैं और उनके कृत्य भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की गहरी साजिश का हिस्सा थे। वे सिर्फ साजिश का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि मुख्य अपराधी थीं’।
वहीं बचाव पक्ष ने शिक्षा और स्वास्थ्य का हवाला देकर नरमी की मांग की थी। इस पर कोर्ट ने अपने 286 पेज के आदेश में कहा था कि शिक्षा और मेडिकल स्थिति जैसे कारक उन मामलों में ज्यादा मायने रखते हैं जो एक बार की घटना हो। इस मामले में दोषियों का आचरण लगातार और स्वेच्छा से किया गया था।
कोर्ट ने टिप्पणी की थी- ‘दोषियों के कृत्य ऐसे हैं जो भारत के अस्तित्व पर हमला करते हैं और भारत के एक अभिन्न अंग के अलगाव का लक्ष्य रखते हैं’। आसिया अंद्राबी ने 1987 में दुख्तरान-ए-मिल्लत की स्थापना की थी। यह संगठन UAPA की पहली अनुसूची के तहत प्रतिबंधित है। अप्रैल 2018 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
कौन हैं आसिया अंद्राबी?
आपको बता दें कि 64 वर्षीय आसिया मूलत: श्रीनगर की रहने वाली हैं। होम साइंस में ग्रेजुएट आसिया ने 1987 में DeM की स्थापना की। शुरू में इसे एक सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन बताया गया, लेकिन बाद में यह कट्टरपंथी अलगाववादी महिला संगठन बन गया। केंद्र सरकार ने 2018 में DeM को UAPA के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर पूरे देश में प्रतिबंध लगा दिया था।
अंद्राबी पर आरोप है कि वह कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित अलगाववाद, हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के लिए फंडिंग, युवाओं को भड़काने, और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश में शामिल रही है। उसे पाकिस्तानी झंडे फहराने और आतंकियों की पैरवी के वीडियोज़ के कारण भी जाना जाता है।
