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आतंक ने उजाड़ा था आशियाना, अब सरकार बनी सहारा; 33 साल बाद पीड़ितों के घर लौटी खुशी, LG सिन्हा ने सौंपे नियुक्ति पत्र

श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को आतंकवादी हिंसा में मारे गए निर्दोष नागरिकों के परिवारों के लिए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों के स्वजनों को सरकारी नौकरी देने का फैसला सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि न्याय, पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कांफ्रेंस सेंटर (SKICC) में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने आतंक पीड़ित परिवारों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह पहल उन हजारों परिवारों के लिए आशा की नई किरण है जो सालों से न्याय का इंतजार कर रहे थे।

उपराज्यपाल ने भावुक होते हुए कहा कि किसी अपने को खोने के दर्द की भरपाई न तो नौकरी कर सकती है और न ही पैसा। लेकिन ऐसे परिवारों के साथ खड़ा रहना सरकार की संवैधानिक, नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी है।

उन्होंने साफ कहा, “हमारी प्रतिबद्धता अटूट है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से प्रभावित हर एक पात्र परिवार तक सरकारी मदद पहुंचेगी। कोई भी परिवार उपेक्षित नहीं रहेगा। हर पीड़ित को न्याय और सम्मान के साथ जीवन दोबारा शुरू करने का मौका मिलेगा।”

आतंक के पूरे नेटवर्क पर प्रहार जारी

उपराज्यपाल ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर को आतंकमुक्त बनाने के लिए कार्रवाई लगातार जारी है। जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना, सीआरपीएफ और नागरिक प्रशासन मिलकर आतंकवाद के पूरे तंत्र को ध्वस्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का खात्मा सिर्फ सुरक्षा बलों की नहीं, बल्कि हर शांति पसंद नागरिक की भी साझा जिम्मेदारी है।

5 अगस्त 2019 को बताया निर्णायक मोड़

उपराज्यपाल ने 5 अगस्त 2019 के संवैधानिक बदलावों को जम्मू-कश्मीर के इतिहास का टर्निंग पॉइंट बताया। उन्होंने कहा कि इससे दशकों से चला आ रहा भेदभाव खत्म हुआ और सभी नागरिकों को समान अधिकार मिले। इसके बाद केंद्र के 890 से ज्यादा कानून यहां लागू हुए, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में दिए बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद के कारण जम्मू-कश्मीर में 41 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई है।

33 साल बाद मिला न्याय, जमीन-जायदाद भी लौटाई

कार्यक्रम में उपराज्यपाल ने कई ऐसे मामलों का जिक्र किया जो सालों से लटके हुए थे। उन्होंने बताया कि शोपियां के वली मोहम्मद वानी के परिवार को 33 साल बाद न्याय मिला, जबकि कुपवाड़ा के अब्दुल हमीद भट और त्राल के फारूक अहमद मीर के परिवारों को 20 साल से ज्यादा इंतजार के बाद नौकरी मिली है।

उन्होंने यह भी बताया कि कई पीड़ित परिवारों की जमीन और संपत्ति भी वापस दिलाई गई है और सभी लंबित मामलों की संवेदनशीलता और पूरी पारदर्शिता के साथ समीक्षा की जा रही है।

युवाओं को सहानुभूति नहीं, अवसर चाहिए

उपराज्यपाल ने कहा कि अब जम्मू-कश्मीर में भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह योग्यता और पारदर्शिता पर आधारित है। यहां के युवाओं को सहानुभूति नहीं, बल्कि अवसर चाहिए।

उन्होंने कुपवाड़ा के एक छात्र से बातचीत का किस्सा साझा करते हुए कहा कि पहले जहां व्यवधानों के कारण 3 साल की डिग्री 7 साल में पूरी होती थी, वहीं अब शैक्षणिक सत्र समय पर पूरे हो रहे हैं। सड़क, सुरंग, एयरपोर्ट, कॉलेज और अस्पतालों के अभूतपूर्व विकास से निवेश और रोजगार के नए रास्ते खुले हैं।

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