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कश्मीर घाटी में दीवाली की धूम, लालचौक से रेजिडेंसी रोड तक बाजार गुलजार; पर्यटकों में भी भारी उत्साह

श्रीनगर। पूरे देश के साथ कश्मीर घाटी में भी दीपावली की तैयारियां अब अपने चरम पर हैं। धनतेरस पर घाटी के बाजारों में त्योहारी रौनक देखते ही बनी। लालचौक से लेकर रेजिडेंसी रोड तक हर तरफ दीये, मिठाइयों, झालरों और पटाखों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है। श्रीनगर के लालचौक, गोनीखन, रीगल चौक, रेजिडेंसी रोड और एमए रोड पर दीपावली की सामग्री के विशेष स्टाल लगाए गए हैं। इन स्टालों पर तरह-तरह के मिट्टी के दीये, रंग-बिरंगी झालरें, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, पटाखे और मिठाइयों की भरमार है।

कश्मीरी हिंदुओं के साथ-साथ घाटी घूमने आए पर्यटक भी जमकर खरीदारी कर रहे हैं। कई पर्यटकों के लिए यह पहला मौका है जब वे कश्मीर में दीपावली मना रहे हैं और वे यहां से दीये, केसर, ड्राई फ्रूट्स और कश्मीरी शाल खरीदकर ले जा रहे हैं।

धनतेरस पर दुकानों पर दिनभर लगी रही भीड़

धनतेरस पर शुक्रवार को कश्मीरी हिंदू परिवारों ने शुभ मुहूर्त में आभूषण, बर्तन, इलेक्ट्रानिक सामान और घरेलू जरूरत की अन्य वस्तुएं खरीदीं। जौहरियों की दुकानों पर सोने-चांदी के सिक्कों और हल्की ज्वेलरी की विशेष मांग देखी गई। बर्तन बाजार में भी दिनभर चहल-पहल बनी रही।

दुकानदारों का कहना है कि इस बार पिछले साल के मुकाबले ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। पर्व को लेकर घाटी के मंदिरों को भी विशेष रूप से सजाया गया है।

मंदिरों में रोशनी और बाजारों में मिठाइयों की बहार

लालचौक के हरी सिंह हाई स्ट्रीट स्थित श्री हनुमान मंदिर को दीयों और बिजली की रंगीन झालरों से दुल्हन की तरह सजाया गया है। इसके अलावा इंदिरा नगर, जवाहर नगर, बारामुला, अनंतनाग और बड़गाम के मंदिरों में भी दीपावली के लिए विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शाम होते ही मंदिरों में झालरों की रोशनी से पूरा इलाका जगमगा उठता है।

दुकानदारों के अनुसार, इस बार बाजार में पर्यावरण-अनुकूल दीयों और कश्मीरी कारीगरों द्वारा बनाए गए सजावटी सामान की मांग ज्यादा है। मिट्टी के दीयों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक दीये, फैंसी लाइट्स और घर सजाने के सामान की बिक्री भी जोरों पर है।

मिठाई की दुकानों पर भी सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। कश्मीरी हिंदू परिवारों के लिए पारंपरिक मिठाइयों के साथ-साथ काजू कतली, लड्डू और गुलाब जामुन की विशेष मांग है।

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