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कश्मीर तक वंदे भारत, लद्दाख में 1800 KM तक फैला सड़कों का जाल… अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल बाद बदला विकास का नक्शा

जम्मू। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से विकास की एक नई पटकथा लिखी गई है। जहां कश्मीर तक वंदे भारत एक्सप्रेस का सपना साकार हुआ है। वहीं, केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में पिछले सात वर्षों में सड़क विकास ने नई ऊंचाइयां छू ली हैं। हालांकि, इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रदेश में रेल पहुंचाने का सपना अभी भी अधूरा है।

पांच अगस्त 2019 को लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से लगभग अठारह सौ किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है। हाल ही में जोजि ला टनल के ब्रेकथ्रू के बाद, भूतल परिवहन मंत्रालय ने 990 करोड़ रुपये की लागत से लेह बाइपास सड़क बनाने की मंजूरी दी है।

टनल और सड़कों का निर्माण

मंत्रालय और सीमा सड़क संगठन मिलकर लद्दाख की सड़कों, पुलों और टनलों का निर्माण कर रहे हैं, लेकिन रेलमार्ग से लद्दाख को शेष देश से जोड़ने की योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।

रेल मंत्रालय ने कश्मीर तक रेलगाड़ी पहुंचाने में सफलता हासिल की है, लेकिन लद्दाख तक पहुंचाने के लिए सर्वे और विभागीय प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने से आगे कुछ नहीं हो पाया है। पिछले वर्ष इस परियोजना का सर्वेक्षण पूरा करने के बाद डीपीआर तैयार की गई थी।

लगभग 489 किलोमीटर लंबी बिलासपुर–मनाली–लेह रेलवे लाइन को सामरिक रेल कॉरिडोर के रूप में चिन्हित किया गया है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 1.31 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके बाद से परियोजना के अगले चरण की मंजूरियों का इंतजार हो रहा है।

664 किलोमीटर रेल लाइन का किया सर्वे

यह परियोजना वित्तीय स्वीकृतियों, पर्यावरणीय मंजूरियों और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े तकनीकी पहलुओं के निर्णय के बाद ही आगे बढ़ेगी। वर्ष 2017-2018 में पठानकोट-लेह तक 664 किलोमीटर रेल लाइन का सर्वे किया गया था। इसके बाद 2023 में हिमाचल प्रदेश की ओर से 498 किलोमीटर रेल लाइन का सर्वे किया गया, जिसका खर्च 99,201 करोड़ रुपये आंका गया था।

अब हुए सर्वे में इस परियोजना की लागत 1.31 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। लद्दाख के निवासी फिरोज खान का कहना है कि लद्दाख तक रेल पहुंचाना हमारी पुरानी मांग है।

सर्दियों में भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण ट्रैफिक प्रभावित होता है। कश्मीर तक रेल पहुंचने से वहां विकास को तेजी मिली है, लेकिन लद्दाख में रेल पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ है। लद्दाख की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए, इस प्रदेश में रेल पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

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