
जम्मू। किश्तवाड़ के छात्रू क्षेत्र में हुए आतंकी हमले की जांच में एनआइए ने आतंकियों के मददगार मनीर अहमद और सुरक्षाबलों की मुठभेड़ में मारे गए तीन पाकिस्तानी आतंकियों को आरोपित बनाया है।
इस वर्ष 22 फरवरी को यह हमला हुआ था और करीब पांच माह की जांच के बाद आतंकी साजिश के तार पाकिस्तान तक जुड़े मिले। जांच एजेंसी ने जम्मू की विशेष अदालत में 535 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है।
मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों में जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर पाकिस्तान निवासी सैफुल्लाह कश्मीरी भी शामिल था वह कई अन्य नामों से भी जाना जाता था। वह नागरिकों व सुरक्षाबल पर हमले में शामिल रहा है।
कश्मीर टाइगर्स के अजराइल ग्रुप से जुड़े थे आतंकी
जांच एजेंसी के अनुसार, मारे गए तीनों आतंकी कश्मीर टाइगर्स के अजराइल समूह से जुड़े थे और किश्तवाड़ के ऊपरी पहाड़ी इलाकों में सक्रिय थे। कश्मीर टाइगर्स को जैश का मुखौटा संगठन बताया जाता है।
एनआइए की जांच में सामने आया कि छात्रू के नैदगाम निवासी मनीर अहमद ने आतंकियों को पनाह देने और उनकी गतिविधियों में मदद करने में भूमिका निभाई। इन आतंकियों पर किश्तवाड़ के पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षाबलों और आम नागरिकों को निशाना बनाने के आरोप हैं।
एजेंसी ने मनीर अहमद के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। वहीं, अन्य आरोपितों के खिलाफ भारत के विरुद्ध युद्ध छेड़ने और साजिश रचने से जुड़े कानूनी प्रविधान भी आरोपपत्र में शामिल किए गए हैं।
जवाबी कार्रवाई में तीन आतंकी ढेर हुए
जांच एजेंसी के अनुसार, सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकी मारे गए थे। यह समूह क्षेत्र में कई ऐसे हमलों में कथित तौर पर शामिल रहा है, जिनमें सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय नागरिकों की जान गई।
करीब पांच माह तक चली जांच के दौरान एजेंसी ने हमले के पीछे की साजिश, आतंकियों के नेटवर्क और स्थानीय स्तर पर उन्हें कथित तौर पर मिली मदद की पड़ताल की। अब अदालत में आरोपपत्र के आधार पर मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जबकि जांच एजेंसी हमले से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
