
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्वामित्व वाले सार्वजनिक उपक्रमों की वित्तीय तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की 31 मार्च 2023 तक की स्थिति पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 42 पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (पीएसई) कैग के ऑडिट दायरे में थे।
इनमें 39 सरकारी कंपनियां, 2 वैधानिक निगम जिनमें जेकेएसआरटीसी और जम्मू कश्मीर एंड लद्दाख फानेंशियल कॉरपोरेशन और एक चिनाब वेली पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड शामिल है, जो जेकेएसपीडीसी, एनएचपीसी का जाइंट वेंचर, भी शामिल थी। इन 42 में से 6 पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज पूरी तरह निष्क्रिय पाई गईं।
न तो वे अर्थव्यवस्था में योगदान दे रही हैं, न ही जिस उद्देश्य से बनाई गईं थीं उसे पूरा कर रही हैं। सक्रिय सिर्फ 36 हैं। कैग ने सरकार से उन सार्वजनिक उपक्रमों की समीक्षा करने को कहा है जिनकी नेटवर्थ लगातार घाटे के कारण खत्म हो चुकी है और उनके संचालन को अधिक दक्ष तथा लाभकारी बनाने के लिए कदम उठाने की जरूरत बताई। यही नहीं कैग ने साफ कहा है कि सरकार को इन 6 निष्क्रिय कंपनियों को बंद करने पर जल्द फैसला लेना चाहिए।
मुनाफा बढ़ा, लेकिन तस्वीर एक कंपनी के भरोसे
कैग के मुताबिक नवीनतम उपलब्ध अंतिम खातों के आधार पर 42 में से 11 पीएसयू ने मुनाफा दर्ज किया। इनका कुल रिपोर्टेड मुनाफा 2021-22 के 566.10 करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-23 में 1286.79 करोड़ रुपये हो गया। लेकिन इस बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा जम्मू-कश्मीर बैंक लिमिटेड से आया।
रिपोर्ट के अनुसार जेएंडके बैंक ने 2022-23 में 1197.38 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जो सभी लाभ कमाने वाले पीएसयू के कुल मुनाफे का 93.05 प्रतिशत था। चिनाब वेली पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का मुनाफा 24.69 करोड़ रुपये रहा।
यानी सरकारी उपक्रमों के कुल मुनाफे का बड़ा हिस्सा एक ही सूचीबद्ध कंपनी के प्रदर्शन से आया। कैग ने यह भी दर्ज किया कि जेएंडके बैंक ही एकमात्र पीएसयू था जिसने लाभांश घोषित और भुगतान किया। बैंक ने 31 मार्च 2023 को समाप्त वर्ष के लिए अपने चुक्ता शेयर पूंजी पर 50 प्रतिशत लाभांश दिया।
20 पीएसयू घाटे में, 14 पीएसयू की पूरी नेटवर्थ खत्म
मुनाफे के समानांतर घाटे की तस्वीर भी सामने आती है। कैग के अनुसार 20 पीएसयू ने 2022-23 में कुल 252.53 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया। इनमें दस गैर-पावर सेक्टर उपक्रमों का घाटा ही 234.15 करोड़ रुपये था।
इनमें जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (जेकेआरटीसी) का घाटा 117.62 करोड़ रुपये, जेएंडके सीमेंट का 25.46 करोड़ रुपये, जेएंडके स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन का 20.54 करोड़ रुपये, जेएंडके मिनरल्स का 18.08 करोड़ रुपये और जेएंडके टूरिज्म डेवलेपमेंट
कॉरपोरेशन का 14.72 करोड़ रुपये रहा
सबसे गंभीर संकेत कई वर्षों के दौरान लगातार जमा हुए कुल घाटे को लेकर है। कैग के अनुसार 31 मार्च 2023 तक 19 पीएसयू पर कुल 4241.34 करोड़ रुपये का घाटा था। इनमें से 14 कंपनियों की कुल संपत्ति उनके वर्षों से जमा घाटे के कारण पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
इन 14 उपक्रमों की संयुक्त बची संपत्ति माइनस 3,699.38 करोड़ रुपये थी, जबकि इनमें स्वामित्व हिस्सेदारी में निवेश 537.12 करोड़ रुपये था। कैग ने बताया कि इनमें से दस पीएसयू की स्वामित्व हिस्सेदारी में निवेश पिछले पांच या उससे अधिक वर्षों से नकारात्मक बनी हुई थी।
सरकारी निवेश का बड़ा हिस्सा पावर सेक्टर में
सरकारी उपक्रमों में निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा बिजली क्षेत्र में केंद्रित है। कैग की आधिकारिक रिपोर्ट में 31 मार्च 2022 तक के आंकड़ों के अनुसार 42 पीएसयू में कुल निवेश 25318.35 करोड़ रुपये था, जिसमें पावर सेक्टर के छह पीएसयू को 18014.79 करोड़ रुपये, यानी 71.15 प्रतिशत, मिला था। इसलिए इसे 78 प्रतिशत बताना सही नहीं होगा।
इसके अलावा पीएसयू के दीर्घकालिक कर्ज का बोझ भी बढ़ा। 31 मार्च 2023 तक कुल लंबे समय के लिए लोन 30709.73 करोड़ रुपये था, जो मार्च 2021 के 12290.18 करोड़ रुपये से काफी अधिक थे। कैग ने इस वृद्धि में जम्मू-कश्मीर पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और चिनाब वेली पावर प्रोजेक्ट्स के बड़े कर्ज को प्रमुख कारकों में गिना है।
कैग की महत्वपूर्ण टिप्पणी यह भी है कि 30 सितंबर 2023 तक 2022-23 के लिए केवल चार सरकारी कंपनियों ने अपने खाते पूरक ऑडिट के लिए जमा किए थे। रिपोर्ट में कहा गया कि खातों में देरी से ये संस्थान विधायी निगरानी के दायरे में प्रभावी रूप से नहीं रह पाते। कैग ने सरकार से घाटे में चल रहे पीएसयू के कारणों का विश्लेषण करने, उनकी कार्यक्षमता सुधारने और जिन उपक्रमों की नेटवर्थ लगातार खत्म हो रही है, उनके बारे में ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई है।
