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देश के लिए गर्व का पल, 12वीं सदी में लिखी गई कश्मीर की राजतरंगिणी UNESCO के विश्व रजिस्टर में शामिल

जम्मू। कश्मीर की ऐतिहासिक विरासत राजतरंगिणी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। कल्हण की राजतरंगिणी यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर में शामिल हुई है। 12वीं शताब्दी में रचित कल्हण ग्रंथ कश्मीर के इतिहास, शासकों, राजनीतिक विकास व समाज का प्रमाणिक ऐतिहासिक विवरण है।

यही नहीं कश्मीर में मिली भोजपत्र वाली महाभारत की पांडुलिपि व कौटिल्य के अर्थशास्त्र की पांडुलिपि को इस रजिस्टर में स्थान मिला है।

वहीं उपराज्यपाल मनोज सिन्हा व सीएम उमर अब्दुल्ला ने बधाई दी। राजतरंगिणी की दुर्लभ पांडुलिपि श्रीनगर की ओरिएंटल रिसर्च लाइब्रेरी में संरक्षित है। महाभारत की लगभग 400 साल पुरानी भोजपत्र पांडुलिपि भी कश्मीर से प्राप्त हुई थी।

यह उपलब्धि कश्मीर को केवल प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन लेखन और ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में सामने लाती है। कल्हण ने राजतरंगिणी की रचना की थी।

इसमें कश्मीर के राजाओं, उनके शासनकाल, राजनीतिक घटनाक्रम और तत्कालीन सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों का विवरण मिलता है।

बल्कि भारत की प्राचीन लेखन और ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में सामने लाती है। कल्हण ने राजतरंगिणी की रचना की थी। इसमें कश्मीर के राजाओं, उनके शासनकाल, राजनीतिक घटनाक्रम और तत्कालीन सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों का विवरण मिलता है।

क्या है खासियत?

इसकी खासियत यह है कि कल्हण ने इतिहास लिखते समय राजाओं की प्रशंसा या घटनाओं के वर्णन तक खुद सीमित नहीं रखा, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों, परंपराओं व आलोचनात्मक दृष्टिकोण का सहारा लिया। इसी वजह से राजतरंगिणी को भारतीय इतिहास लेखन की महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है।

मध्यकालीन कश्मीर को समझने के लिए भी यह एक अहम ऐतिहासिक स्रोत है। राजतरंगिणी को भारतीय इतिहास लेखन की महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है। मध्यकालीन कश्मीर को समझने के लिए भी यह एक अहम ऐतिहासिक स्रोत है।

पूरे देश के लिए गौरव का क्षण: मनोज सिन्हा

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इंटरनेट मीडिया एक्स पर इसे जम्मू-कश्मीर और पूरे देश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि राजतरंगिणी का इस प्रतिष्ठित रजिस्टर में शामिल होना केंद्र शासित प्रदेश की समृद्ध बौद्धिक और ऐतिहासिक विरासत का वैश्विक स्तर पर सम्मान है।

इन ऐतिहासिक ग्रंथों को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता भारत की सभ्यतागत परंपराओं के शाश्वत महत्व और मानवता के प्रति उनके योगदान को रेखांकित करती है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी अमूल्य ज्ञान परंपरा को संरक्षित और प्रोत्साहित करने की सामूहिक जिम्मेदारी का अहसास कराती है।

ऐतिहासिक विरासत का सम्मान: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यूनेस्को की यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता जम्मू-कश्मीर की गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत का सम्मान है। यह उपलब्धि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देने के साथ-साथ इसकी समृद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन के महत्व को भी रेखांकित करती है।

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