Site icon JK Fact

लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ने ईद पर पाकिस्तान में 80 करोड़ रुपये की कुर्बानी की खालें और नकद चंदा जमा किया है।

इस राशि का उपयोग कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए होगा, जिसमें जैश ने हमास को 5 करोड़ रुपये भी भेजे हैं।

श्रीनगर। ऑपरेशन सिंदूर में नष्ट हुए अपने नेटवर्क और आतंकी शिविरों को फिर से तैयार करने में जुटे लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद ने बीते सप्ताह ईद के अवसर पर लगभग करोड़ों रूपये बतौर कश्मीर जिहाद के नाम पर जमा किया है। दोनों संगठनों ने पूरे पाकिस्तान ईद के अवसर पर कुर्बान किए गए जानवरों की लगाभग 80 करोड़ रूपये मूल्य की खालें भी जमा की हैं।

कुर्बानी की खालाें की कमाई यह दोनों संगठन कश्मीर में आतंकी हिंसा को बढ़ावा देने और निर्दाेषों का खून बहाने में इस्तेमाल करेंगे।कुर्बानी की खालों को जमा करने के लिए दोनो ंसंगठनों ने अपनी कथित एनजीओ के अलावा विभिन्न इलाकों में सक्रिय अपने मौलवियाें का सहारा लिया है।

ईद उल जुहा के अवसर पर पूरी दुनिया में मुस्लिम जानवरों की कुर्बानी करते हैं। इन जानवरों की खाल को कई लोग दान करते हैं और कई स्वयं भी बेचते हैं या फिर नष्ट कर देते हैं। विभिन्न इस्लामिक संगठन इन खालों को जमा करते हैं और उनकी कमाई का इस्तेमाल वह इस्लामिक गतिविधियों और लोकभलाई के काम में करते हैं। आतंकी संगठन जो पूरी दुनिया में इस्लाम के राज की बहाली के लिए लोगों का खून बहाने का काम करते हैं, भी अपने वित्तीय तंत्र को जिंदा रखने के लिए कुर्बानी की खालों को जमा करते हैं।

विभिन्न खुफिया एजेंसियों के अनुसार, लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद जिनकी आतंकी गतिविधियां पूरी तरह से कश्मीर केंद्रित हैं और जिन्हे भारत के खिलाफ पाकिस्तान अपने फुट सोल्जर की तरह इस्तेमाल करता है, का वित्तीय ढांचा अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों के चलते प्रभावित हुआ है। आपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना की कार्रवाई में इनके मुख्यालय, प्रमुख मदरसे और आतंकी शिविर नष्ट हो चुके हैं और उन्हें पहले से ज्यादा वित्तीय संसाधन चाहिए ताकि वह अपने कश्मीर जिहाद काे जारी रख सकें।

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, इस वर्ष पाकिस्तान में लश्कर और जैश ने ईद से लगभग एक सप्ताह पहले ही लोगों केा विभिन्न माध्यमों से सूचित करना शुरु कर दिया था कि वह कुर्बानी की खालों को बाजार में बेचने या नष्ट करने के बजाय उनके स्थानीय सेंटरों में या फिर उनके द्वारा स्थापित किए जाने वाले स्टाल पर उपलब्ध कराएं। इनका उपयोग वह इस्लाम और कश्मीर जिहाद के लिए करेंगे।

सूत्रों के अनुसार, जैश ए मोहम्मद ने अल रहमत ट्रस्ट्र अल अख्तर ट्रस्ट्र और जमात उल मोमिनात के बैनर का भी इस्तेमाल किया है। जैश से संबधित इन संगठनों ने अलग अलग जगहों पर न सिर्फ स्टाल लगाए थे बल्कि इनमें शामिल कैडर ने कई जगह घूम घूमकर भी कुर्बानी की खालों को जमा किया है।

लश्कर-ए-तैयबा की तरफ से फलाह ए इंसानियत ट्रस्ट व अल्लाह ओ अकबर तहरीक कुर्बानी की खालों का जमा करने में आगे रही है। लश्कर के कई प्रमुख मौलवी और माटिवेटर भी अपने अपने कैडर के साथ खालों का े जमा करने निकले। सूत्रों के अुनसार, सिर्फ कराची और उसके साथ सटे इलाकों में ही जैश ने पाकिस्तानी मुद्रा में लगभग 25 लाख रूपये की खालों काे जमा किया है। दोनो ंसंगठनों ने लगभग 80 करोड़ रूपये मूल्य की खाले जमा की हैं। इसके अलावा इन दोनों संगठनों ने नकद चंदा भी जमा किया है।

सूत्रों ने बताया कि इस दौरान एक बात और जो ध्यान देने योग्य है। वह यह कि जैश ए मोहम्मद ने हमास को पाकिस्तानी मुद्रा में कथित तौर पर पांच करोड़ रूपये की राशि ईद के अवसर पर उपलब्ध कराई है। इससे पता चलता है कि दोनों संगठनों के बीच रिश्ते अब सिर्फ वैचारिक नहीं हैं बल्कि दोनों के बीच रणनीति सहयोग भी लगातार बढ़ता जा रहा है। हमास के कमांडरों की गत वर्ष जैश की रैलियों में मौजूदगी और अब जैश द्वारा उसकी वित्तीय मदद किया जाना, कश्मीर के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण है।

जम्मू कश्मीर मामलों के जानकार रमीज मखदूमी ने कहा कि जिहादी संगठनों द्वारा जमा की जा रही कुर्बानी की खालें मुस्लिमों में अशिक्षा और सामाजिक कुरीतियों केा दूर करने के बजाय कश्मीरियों का खून बहाने के लिए ही इस्तेमाल होंगी। यह पहले होता रहा है और यही अब आगे होगा।

पाकिस्तान में जिस तरह से आतंकी संगठनों ने पहले रमजान में ‘कश्मीर जिहाद’ के नाम पर खुलेआम चंदा जमा किया और अब उन्होंने कुर्बानी की खालें जमा की हैं, उससे पता चलता है कि पाकिस्तान में उनका तंत्र पूरी तरह मजबूत है, उन पर पाकिस्तान सरकार की या अमेरिका की पाबंदियां सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।

Exit mobile version