
जम्मू। जम्मू-कश्मीर की सियासत में नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। श्रीनगर से पार्टी के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने कुर्सी के बजाय उसूलों को तरजीह देते हुए संसद की सदस्यता और पार्टी से अपने 24 साल पुराने रिश्ते को खत्म करने का फैसला ले लिया है। मेहदी के घर के गेट पर लगे दो बड़े बैनर उस संदेश को बयां करते हैं, जो वे देना चाहते हैं। एक पर लिखा है, ‘वादा कुर्सी से बड़ा है’, जबकि दूसरे पर लिखा है, ‘किरदार की सियासत, उसूलों की सियासत’।
मेहदी ने एलान किया है कि वे 3 नवंबर को अपने पिता की पुण्यतिथि पर रैली के दौरान NC सांसद के पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे देंगे। हर तरफ इसकी चर्चा हो रही है। एक कार्यकर्ता ने कहा, ‘नाई की दुकान पर भी लोग किसी और के लिए अपनी कुर्सी नहीं छोड़ते, भले ही वह व्यक्ति उम्र में बड़ा हो। यहाँ एक ऐसा इंसान है जो उसूलों की खातिर अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार है। भला इस तरह अपनी कुर्सी कौन छोड़ता है?
अब पार्टी पर वादे से मुकरने का आरोप
एक इंटरव्यू में मेहदी ने कहा, “मैं 24 साल से इस NC का हिस्सा रहा हूँ। मैंने इसमें इसलिए शामिल होने का फैसला किया था क्योंकि मुझे लगा कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों की स्वायत्तता और उनके अधिकारों के लिए खड़ा है, लेकिन अनुच्छेद 370 हटने के बाद, हमारे पास जो थोड़ी-बहुत स्वायत्तता बची थी, वह भी छीन ली गई। 2024 के विधानसभा चुनावों में, मौजूदा हालात को चुनौती देने के वादे पर पार्टी को एक मजबूत जनादेश मिला था, लेकिन वह अपना वादा निभाने में नाकाम रही।’
‘मैं डरता नहीं हूँ’
उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर आरोप लगाया कि वे अनुच्छेद 370, वक्फ संशोधन अधिनियम, मुसलमानों से जुड़े मुद्दों और आरक्षण को लेकर अपने चुनावी रुख से पीछे हट गए हैं और भाजपा के इतने करीब चले गए हैं कि मानो उन्होंने पूरी तरह से समर्पण ही कर दिया हो।
सैयद रुहुल्लाह मेहदी के पिता आगा सैयद मेहदी एक प्रमुख शिया धर्मगुरु और कांग्रेस नेता थे, जिनकी 3 नवंबर, 2000 को एक आतंकी हमले में हत्या कर दी गई थी। मेहदी आगे कहते हैं, ‘मुझे पता है कि यह एक लंबी लड़ाई होगी, लेकिन मैं डरता नहीं हूँ।’
नेकां और पीडीपी को हटाकर नए राजनीतिक विकल्प की जरूरत
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कई सालों तक NC और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के बीच भी एक वैचारिक मुकाबला रहा। मैं हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का समर्थन नहीं कर रहा हूँ, क्योंकि वे बिल्कुल दूसरे छोर पर थे, लेकिन जब वैचारिक मुकाबले की बात आई, तो सड़कों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का नहीं, बल्कि दूसरी तरफ वालों का दबदबा था।
उन्होंने कहा कि लोगों को NC और PDP जैसी पारंपरिक राजनीतिक ताकतों को हटाकर, उनकी जगह ऐसी मजबूत ताकतों को लाना चाहिए जो अपने विचारों पर पक्की हों। इन दोनों राजनीतिक दलों और इनके जैसे अन्य दलों की एक आम समस्या यह है कि इनमें चरित्र की कमी है। यही बात इन सबमें एक जैसी है।
मेहदी ने आगे कहा, लोगों ने NC और PDP पर भरोसा किया था। लेकिन उन्होंने भी वैसे ही नतीजे दिए। मुख्यमंत्री और उनकी सरकार की आलोचना करने वाले मेहदी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार, विधानसभा और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के ज़रिए अनुच्छेद 370 हटने के बाद की स्थिति को सामान्य बना दिया।
उन्होंने कहा, ‘उनकी पार्टी बिल्कुल वही भाषा बोलने लगी, जो BJP चाहती थी कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद पूरे देश के लोग बोलें।’
‘फारूक अब्दुल्ला ने मुझे पार्टी छोड़ने के लिए कहा’
मेहदी ने बताया कि NC अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के हाल ही के एक इंटरव्यू से उन्हें और स्पष्टता मिली। अब्दुल्ला ने कहा था कि अगर मेहदी को अपनी बातों पर इतना ही यकीन है, तो वे पार्टी से इस्तीफा देने के लिए आज़ाद हैं। डॉ. अब्दुल्ला ने मेरे बारे में कहा कि अगर मुझे लगता है कि अनुच्छेद 370 को बहाल किया जा सकता है, तो मैं पार्टी छोड़कर उसे बहाल करवाने के लिए स्वतंत्र हूँ। असल में, वे यह कह रहे थे कि उन्हें खुद नहीं लगता कि अनुच्छेद 370 को बहाल किया जा सकता है।
इससे फिर यह सवाल उठता है कि अगर उन्हें नहीं लगता कि इसे संवैधानिक तरीके से बहाल किया जा सकता है, तो फिर चुनाव प्रचार के दौरान जम्मू-कश्मीर के लोगों को यह भरोसा क्यों दिलाया गया? उसी इंटरव्यू में उन्होंने मुझसे पार्टी से इस्तीफा देने के लिए कहा, क्योंकि उनके नज़रिए से, अनुच्छेद 370 हटने के बाद की स्थिति को सामान्य बनाने की प्रक्रिया में मैं एक रुकावट बन गया था। उन्होंने कहा, “वे चाहते थे कि मैं पार्टी छोड़ दूं क्योंकि मैं उनके रुख पर सवाल उठा रहा हूं।”
‘श्रीनगर में जीत का श्रेय सिर्फ नेकां को देना सही नहीं’
मेहदी ने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में श्रीनगर से उनकी जीत के लिए सिर्फ NC जिम्मेदार थी। उन्होंने कहा, ‘पिछले 30 से 40 साल में NC को इस संसदीय क्षेत्र में कभी 1.5 लाख से ज्यादा वोट नहीं मिले। इस बार मुझे लगभग 3.80 लाख वोट मिले। इनमें से ज्यादातर समर्थन दक्षिण कश्मीर के उन लोगों से मिला, जो NC से जुड़े हुए नहीं थे।
दरअसल, 2023 में परिसीमन प्रक्रिया के दौरान दक्षिण कश्मीर के पुलवामा और शोपियां के कई इलाकों को श्रीनगर संसदीय क्षेत्र में शामिल कर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि उन्होंने NC के टिकट पर चुनाव लड़ा था और पार्टी के नाम व चुनाव चिह्न का इस्तेमाल किया था, इसलिए इस्तीफा देना जरूरी हो गया था, क्योंकि वह अब खुद को उस संगठन से अलग करना चाहते थे।
शिया समुदाय के एक प्रमुख नेता मेहदी ने कहा कि वह एक विश्वसनीय राजनीतिक विकल्प तैयार करने के लिए समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों से संपर्क कर रहे हैं, जिनमें पत्रकार, वकील, डॉक्टर और शिक्षक शामिल हैं।
नए संगठन के लिए बेदाग छवि और पक्के इरादे वाले लोगों की तलाश
उन्होंने कहा, ‘मैं ऐसे लोगों की तलाश कर रहा हूं जिन पर कोई पुराना बोझ न हो, जिनमें पक्का इरादा हो और जो इस रास्ते पर चलने के लिए तैयार हों।’ उन्होंने आगे कहा कि किसी भी नए संगठन का ढांचा और नाम बाद में तय किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि वह भविष्य में श्रीनगर निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उपचुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके इस्तीफे के फैसले के पीछे कोई चुनावी महत्वाकांक्षा नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘मैं लोगों के साथ यह मोलभाव नहीं कर रहा हूं कि इस्तीफा देने के बदले मुझे क्या मिलेगा। इसका चुनावी नतीजों या लोगों के बर्ताव से कोई लेना-देना नहीं है। यह मेरे अंतर्मन की आवाज और उसूलों का मामला है।’
