नेशनल कॉन्फ्रेंस शीर्ष नेतृत्व और रुहुल्ला के बीच खटास इस कदर तक बढ़ चुकी है कि सांसद इस्तीफा देने तक के लिए तैयार हो गए

श्रीनगर। श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी अपने तीखे तेवरों के लिए जाने जाते हैं। लोकसभा चुनाव के बाद से ही वह पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े करने लगे थे। अब नेशनल कॉन्फ्रेंस शीर्ष नेतृत्व और रुहुल्ला के बीच यह खटास इस कदर तक बढ़ चुकी है कि सांसद इस्तीफा देने तक के लिए तैयार हो गए हैं।

बीते शुक्रवार उन्होंने फारूक अब्दुल्ला की चुनौती को स्वीकार करते हुए नवंबर में लोकसभा और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देने का एलान किया, जिसके बाद से जम्मू-कश्मीर की सियासत और नेकां में मानो भूचाल सा आ गया है। यह सांसद कौन हैं और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ क्यों हैं, उनकी मांगें क्या हैं? इन सब प्वाइंट्स को आइए आसानी से समझते हैं।

कौन हैं सांसद आगा सैयद?

आगा सैयद रुहुल्ला वर्तमान में नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी से श्रीनगर के सांसद हैं। साल 2024 के आम चुनाव में उन्होंने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के उम्मीदवार वहीद-उर-रहमान पारा को करीब 188000 वोटों से हराया था। वह बडगाम विधानसभा सीट से तीन बार विधायक भी रह चुके हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार में वह विज्ञान और प्रौद्योगिकी व पशुपालक जैसी मंत्रीपद पर भी कार्यरत रहे हैं।

फारूक अब्दुल्ला ने दी थी चुनौती

दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने चार दिन पहले आगा सैयद रुहुल्ला के रवैये को देखते हुए चुनौती दी थी कि वह संसद से इस्तीफा देकर फिर से चुनाव लड़ें पता चल जाएगा कि वोट कैसे मिलते हैं। इसके जवाब में शुक्रवार को उन्होंने त्यागपत्र देने का एलान किया।

क्यों बढ़ी दूरियां?

  • संवैधानिक अधिकारों की बहाली को लेकर दोनों में मतभेद
  • नेकां के राज्य का दर्जा बहाली तक सीमित राजनीति से नाराजगी
  • चुनावी वादों और सत्ता में आने के बाद की रणनीति पर सवाल
  • फारूक की सार्वजनिक चुनौती से निर्णायक हुआ टकराव

उमर अब्दुल्ला के बयानों को बताया घमंडी

सांसद आगा सैयद रुहुल्ला ने मई में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की आलोचना की थी। उन्होंने उमर पर शराब की दुकानों को लेकर पार्टी के रुख से भटकने का आरोप लगाया और उनके बयानों को ‘अहंकारी और घमंडी’ बताया था। 

आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने अपना वादा पूरा न करने के लिए उमर अब्दुल्ला की कड़ी आलोचना की थी और कहा कि मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी (BJP) जैसी भाषा बोल रहे हैं।

कब-कब खिलाफ हुए आगा सैयद?

  • सांसद उमर सरकार का लगातार विरोध करते नजर आए हैं। उन्होंने आर्टिकल 370 को लेकर उमर सरकार पर आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 2019 के बाद खोए अधिकारों को लेकर अपना रुख बदल दिया है। उन्होंने कहा कि 2024 के विधानसभा चुनाव में लोगों ने पार्टी पर भरोसा उसके द्वारा किए गए वादों के आधार पर किया था। लेकिन पार्टी नेतृत्व अब पीछे हट रहा है। रुहुल्लाह मेहदी का आरोप है कि पार्टी अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर के विशेष अधिकारों की बहाली को लेकर अपने वादों और मूल विचारधारा से पीछे हट रही
  • सांसद रुहुल्ला मेहदी आरक्षण नीति, मंत्रियों के पास कई विभागों के होने और सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते रहे हैं।
  • सांसद रुहुल्लाह ने उमर सरकार की शराब नीति पर भी सवाल खड़े किए। सांसद ने कहा था कि नेकां ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि वे शराब की बिक्री को विनियमित करेंगे, रोक लगाएंगे और स्थानीय लोगों के लिए शराब की दुकानें बंद कराएंगे। लेकिन वह अब इसे बढ़ावा दे रहे हैं।

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