
जम्मू। केंद्र सरकार ने लद्दाख को राज्य या विधायिका वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। गृह मंत्रालय ने लद्दाख के नेताओं से अनुच्छेद 371 के मसौदे से पहले लद्दाख के प्रस्तावित राजनीतिक ढांचे से संबंधित 8-10 प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करने और आम सहमति पर पहुंचने को कहा है।
केंद्र व लद्दाख के नेतृत्व ने एक ऐसे “अद्वितीय” मॉडल पर काम करने पर सहमति जताई है जो एक निर्वाचित निकाय को विधायी, कार्यकारी व वित्तीय शक्तियां प्रदान करेगा।
यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित व्यवस्था लद्दाख को राज्य का दर्जा बहाल करने के बराबर नहीं होगी। गत बुधवार को नई दिल्ली में हुई गृह मंत्रालय की सब कमेटी की बैठक में यह बातें रखी गईं। केंद्र व लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच अगली बैठक अक्टूबर के पहले पखवाड़े में होगी।
आशीष कुंद्रा ने और क्या बताया?
लद्दाख में वीरवार को संवाददाता सम्मेलन में मुख्यसचिव आशीष कुंद्रा ने बताया कि लद्दाख के लिए एक विशेष संवैधानिक ढांचे के तहत केंद्र शासित प्रदेश स्तर की निर्वाचित संस्था बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा आगे बढ़ी है।
एलएबी और केडीए के प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई है कि प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय निकाय के चुनाव लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से कराने के बजाय सीधे निर्वाचन क्षेत्रों के माध्यम से कराए जाने चाहिए।
एलएएचडीसी व केंद्र शासित प्रदेश स्तर के निकाय के बीच संबंधों को लेकर कुछ सवाल हैं। यह तय होना जरूरी है कि एलएएचडीसी के अधिकार क्षेत्र में कौन सी शक्तियां आएंगी व केंद्र शासित प्रदेश स्तर के निकाय के अधिकार क्षेत्र में कौन सी। कहा, केंद्र सरकार लद्दाख पर ऐसा कोई मॉडल थोपना नहीं चाहती जो वहां के लोगों को स्वीकार्य न हो।
सिद्धांतों पर सहमति बन जाने के बाद विधेयक का कानूनी मसौदा तैयार किया जाएगा। लद्दाख कभी राज्य नहीं था। यह न तो राज्य होगा और न ही पारंपरिक अर्थों में विधायिका वाला केंद्र शासित प्रदेश।
छठी अनुसूची में लद्दाख को शामिल करने की मूल मांग पर केंद्र के साथ चर्चा के बाद वर्तमान प्रस्ताव सामने आया है। 24 सितंबर की घटना पर वापस लेने के लिए पहचाने गए मामलों को उपराज्यपाल के पास भेजा जाएगा, जबकि मुआवजे का प्रस्ताव भी उनके विचारार्थ भेजा जाएगा।
लद्दाख के संगठनों में निराशा
लेह एपेक्स बाडी (एलएबी) व कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के नेताओं ने गृह मंत्रालय की बैठक की संज्ञा व्यंगकार जसपाल भट्टी की बैठकों से करते हुए कहा कि इससे लद्दाखियों के विश्वास में कमी व अविश्वास बढ़ा है।
दिल्ली में वीरवार की शाम संवाददाता सम्मेलन में लद्दाख के संगठनों के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सब कमेटी की बैठक का उद्देश्य 10 सितंबर से प्रस्तावित लेह से कारगिल पदयात्रा से लोगों का ध्यान भटकाना हो सकता है।
उनके द्वारा गृह मंत्रालय को भेजी गई मांगों की सूची पर कोई चर्चा नहीं हुई। संवाददाता सम्मेलन में लेह अपेक्स बॉडी के सह अध्यक्ष छेरिंग दोरजे, सोनम वांगचुक, केडीए के असगर अली करबलई, सज्जाद कारगिली के साथ लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान मौजूद रहे।
