
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में पहली बार हुए इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता और फिल्ममेकर अकबर खान ने इस फेस्टिवल को न सिर्फ ऐतिहासिक बताया बल्कि इसे भविष्य का कान्स फिल्म फेस्टिवल तक कह दिया। श्रीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और आयोजकों को इस ‘शानदार और रूहानी शुरुआत’ के लिए दिल से बधाई दी।
वहीं फारूक अब्दुल्ला को देश का सबसे बड़ा नेता बताते हुए खान ने कहा कि पिता-पुत्र की यह जोड़ी जम्मू-कश्मीर में शांति और सुनहरे दौर की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि शो मंत्रमुग्ध करने वाला था, सोलफुल था। इसने पहले फिल्म फेस्टिवल की लय और मकसद को पूरी तरह से कैप्चर कर लिया था।
खान ने कहा कि इस फेस्टिवल के लिए श्रीनगर से बेहतर कोई जगह हो ही नहीं सकती थी। उन्होंने भविष्यवाणी की कि यह फेस्टिवल साल-दर-साल इतना बड़ा होगा कि बहुत जल्द कान्स से मुकाबला करेगा।मुझे लगता है कि यह फेस्टिवल हर साल ताकत से आगे बढ़ेगा और बहुत जल्द कान्स फिल्म फेस्टिवल के साथ मुकाबले में होगा और शायद उससे भी बेहतर हो जाएगा।
उन्होंने तर्क दिया कि कान्स के पास वो नहीं है जो कश्मीर के पास है। कान्स ऐसा माहौल नहीं देता। ऐसी खूबसूरत वादियां नहीं देता। जब दुनिया भर के फिल्ममेकर यहां आएंगे तो वो सिर्फ एक-दूसरे की फिल्में नहीं देखेंगे, बल्कि कश्मीर की रूह से भी प्रेरणा लेकर जाएंगे।
‘याहू’ गाने से जुड़ी कश्मीर की फिल्मी यादें
ओपनिंग सेरेमनी की तारीफ करते हुए अकबर खान ने सिंगर्स डॉ. जनास-ए-आर अख्तर, रानी और फलक की परफॉर्मेंस को याद किया। उन्होंने कहा कि इन कलाकारों ने फेस्टिवल के मूड को बखूबी पेश किया। वहीं, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भाषण को उन्होंने ”दिल को छू लेने वाला” बताया। खान ने कहा कि वो बहुत शानदार बोले। उन्होंने चैप्टर बाय चैप्टर, पल-पल याद किया कि कैसे जम्मू-कश्मीर के लोग बॉलीवुड यूनिट्स, फिल्म स्टार्स, डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स से प्यार करते हैं जो यहां फिल्में बनाने आते हैं।
बॉलीवुड और कश्मीर के रिश्ते पर बात करते हुए अकबर खान ने फिल्म ”जंगली” का जिक्र किया। शम्मी कपूर का मशहूर ”याहू” गाना कश्मीर घाटी की पहचान बन गया था। वो एक तरह का बुलावा था जो हर फिल्ममेकर को कहता था कि आओ और कश्मीर में शूट करो।
सिनेमा जोड़े, नफरत नहीं फैलाए
अकबर खान ने अपने संबोधन में सबसे बड़ी बात सिनेमा की जिम्मेदारी पर कही। उन्होंने साफ कहा कि सिनेमा नफरत और प्रोपेगेंडा का औजार नहीं बनना चाहिए। सिनेमा सबसे ताकतवर माध्यम है जो देशों और सभ्यताओं के बीच पुल बनाता है। यह सीमाओं के पार कहानियां, संस्कृति और लोगों को जोड़ता है ताकि वे एक-दूसरे की रूह को समझ सकें।
इतिहास पर बन रही फिल्मों पर सख्त टिप्पणी करते हुए खान ने कहा कि मैं हर फिल्ममेकर का सम्मान करता हूं। हर किसी को अपना आइडिया पेश करने का हक है, लेकिन कभी भी इतिहास को मत तोड़ो-मरोड़ो। जो सिनेमा नफरत फैलाता है, उसे दुनिया के हर कोने में हतोत्साहित किया जाना चाहिए, खासकर जब वह किसी खास प्रोपेगेंडा के लिए बनाया गया हो।
कश्मीर की पहचान सूफियत
कश्मीर की पहचान को बहुत ही खूबसूरत और अलग बताते हुए खान ने कहा कि यहां की जड़ में सूफियत है, जहां सभी जाति और धर्म के लोग एक हैं। उन्होंने इसे प्यार, गर्मजोशी और प्यार से भरा सेक्युलर सेंटर बताया जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख सदियों से साथ रहते आए हैं।
अंत में एक बड़ा ऐलान करते हुए खान ने कहा कि मेरी फिल्म ”ताजमहल: एन इटरनल लव स्टोरी” का प्रीमियर मैं जल्द ही कश्मीर में करूंगा और फिर इसे पूरे भारत में फिर से रिलीज करूंगा। उन्होंने बताया कि 2006 में मलेशिया के प्रधानमंत्री ने भी यह फिल्म देखी थी। ताजमहल प्यार का प्रतीक है और मैं चाहता हूं कि ये पैगाम दुनिया के दिलों में उतरे।
