
जम्मू। जम्मू संभाग में समय-समय पर पकड़े गए रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने अवैध तरीके से भारत में प्रवेश और जम्मू तक पहुंचने के नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। जांच में सामने आए मामलों से यह स्पष्ट हुआ है कि हर व्यक्ति के जम्मू पहुंचने का तरीका एक जैसा नहीं है।
कुछ मामलों में दलालों की मदद, फर्जी पहचान दस्तावेज और देश के भीतर परिवहन के साधनों का इस्तेमाल सामने आया है। वहीं, पुलिस कार्रवाई में ऐसे स्थानीय लोगों की भूमिका भी सामने आई है, जिन पर अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को ठिकाना या भारतीय दस्तावेज उपलब्ध करवाने में मदद करने का आरोप लगा। रोहिंग्या नागरिकों के भारत पहुंचने का एक प्रमुख रास्ता बांग्लादेश रहा है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, म्यांमार से विस्थापित रोहिंग्या आबादी का एक हिस्सा बांग्लादेश के रास्ते भारत में दाखिल हुआ और इसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचा। जम्मू में वर्ष 2021 में पुलिस ने दस्तावेज सत्यापन अभियान के दौरान 148 से 155 रोहिंग्या नागरिकों को वैध यात्रा दस्तावेज नहीं होने के कारण हिरासत में लेकर कठुआ के उपजेल को होल्डिंग सेंटर बनाया था।
दलाल बनते हैं पहला पड़ाव
जम्मू में नवंबर 2023 में पकड़ी गई छह बांग्लादेशी महिलाओं और युवतियों के मामले ने घुसपैठ के तरीके पर महत्वपूर्ण जानकारी सामने रखी थी। पुलिस के अनुसार, इनमें से पांच महिलाएं एक दलाल की मदद से जम्मू पहुंची थीं और बाद में कश्मीर की ओर जा रही थीं। उन्हें बठिंडी इलाके में पकड़ा गया था।
यह मामला इस बात का संकेत देता है कि सीमा पार करने के बाद घुसपैठियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए मानव तस्करी अथवा दलाली का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। जम्मू-कश्मीर में पुलिस जांच के दौरान रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों के लिए भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल करने के मामले भी सामने आए हैं।
दिसंबर 2023 में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 10 विदेशी नागरिकों और उनके कथित मददगारों के खिलाफ भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल करने के आरोप में तीन प्राथमिकी दर्ज की थीं। इनमें आधार कार्ड और डोमिसाइल जैसे दस्तावेज शामिल थे।
काम की तलाश में जम्मू पहुंचने की भी जांच
जम्मू में निर्माण कार्य, मजदूरी और छोटे-मोटे काम के लिए बाहरी श्रमिकों की मांग रहती है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका रहती है कि इसी रोजगार व्यवस्था का फायदा उठाकर अवैध रूप से भारत में दाखिल लोग जम्मू तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, किसी विशेष संगठन द्वारा योजनाबद्ध तरीके से लोगों को जम्मू लाकर बसाने अथवा जनसांख्यिकी बदलने की बात को प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता। यह मुद्दा सुरक्षा और सामाजिक स्तर पर उठाई जा रही एक आशंका है, जिसकी पुष्टि के लिए ठोस जांच आवश्यक है।
घुसपैठ के बाद जम्मू तक कैसे पहुंचते हैं?
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में सामने आए मामलों को देखें तो एक संभावित श्रृंखला कुछ इस तरह बनती है पहले अंतरराष्ट्रीय सीमा के संवेदनशील हिस्सों से चोरी-छिपे भारत में प्रवेश, फिर दलाल के माध्यम से सीमा क्षेत्र से बाहर निकलना, इसके बाद बस या ट्रेन से दूसरे राज्यों में पहुंचना और अंत जम्मू आना।
2025 में एक बांग्लादेशी नागरिक के मामले में भी जांच में क दलाल के माध्यम से पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत में प्रवेश और ट्रेन से आगे जाने की बात सामने आई थी। जम्मू पहुंचने के बाद असली चुनौती उनकी पहचान और ठिकाने का पता लगाना होती है। यही कारण है कि पुलिस स्थानीय स्तर पर किरायेदारों का सत्यापन, संदिग्ध श्रमिकों की पहचान, दस्तावेजों की जांच और विदेशी नागरिकों को आश्रय देने वालों पर कार्रवाई को महत्वपूर्ण मानती है।
