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लद्दाख की मांगों पर केंद्र से बात न बनने पर विरोध-प्रदर्शन का एलान, LG बोले- राजनीतिक फायदे के लिए काम कर रहे कुछ लोग

जम्मू। लद्दाख के मुद्दों को लेकर स्थानीय संगठन फिर आंदोलन की तैयारी में हैं। केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) ने 20 सितंबर को कारगिल में विरोध प्रदर्शन का एलान किया है।

वहीं, लेह अपेक्स बॉडी के पदाधिकारी व पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने क्षेत्र के मुद्दों को लेकर 19 से 24 सितंबर तक पदयात्रा करने की घोषणा की है।

हाल ही में दिल्ली में हुई उपसमिति की बैठक में लद्दाख के मुद्दों पर कोई सहमति न बन पाने पर लेह अपेक्स बॉडी (एलएबी) व कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) निराश हैं। दोनों समूहों ने बैठक को बेनतीजा बताया है।

स्थानीय संगठनों ने केंद्र पर लगाए आरोप

केडीए ने केंद्र सरकार पर लद्दाख की मांगों को लेकर चल रही वार्ता में गंभीरता और ईमानदारी नहीं दिखाने का आरोप लगाया है। पिछले साल हुई लेह हिंसा के पीड़ितों के लिए हाल ही में लद्दाख के उपराज्यपाल की ओर से घोषित मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए केडीए ने मृतकों के परिवारवालों व घायलों के लिए मुआवजा राशि बढ़ाने व सभी लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की है।

सह-अध्यक्ष असगर अली करबलई ने मंगलवार को कारगिल में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि गृह मंत्रालय प्रस्तावित यूटी स्तरीय ढांचे को लेकर कोई उचित मसौदा सामने रखेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बैठक को लेकर अलग-अलग तरह के दावे किए जा रहे हैं।

ऐसे में भविष्य में लद्दाख से संबंधित उप समिति या हाई पावर कमेटी की बैठकों की वीडियो रिकॉर्डिंग व लाइव स्ट्रीमिंग की मांग की जाएगी। केडीए ने मृतकों के परिवारों के लिए एक से 1.5 करोड़ रुपये, गंभीर रूप से घायलों के लिए 50 लाख से एक करोड़ रुपये व मामूली रूप से घायल लोगों के लिए 30 से 50 लाख रुपये तक मुआवजे की मांग की है।

कुछ लोग राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे काम: उपराज्यपाल

लद्दाख में नए विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे समूहों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि कुछ लोग अपने राजनीतिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें केंद्र शासित प्रदेश के विकास की कोई परवाह नहीं है।

लद्दाख-जंस्कार महोत्सव के उद्घाटन के बाद पत्रकारों से बातचीत में सक्सेना ने कहा कि राजनीतिक मुद्दों का अपना महत्व है, लेकिन विकास एक अलग मामला है और किसी को भी लद्दाख की प्रगति में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।

उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा, लद्दाख के लोगों को यह देखना चाहिए कि जब से लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश बना है, तब से यहां कितना विकास हुआ है। यहां उस समय क्षेत्र में लगभग 1,700 किलोमीटर सड़कें थीं, जो आज यह आंकड़ा लगभग 4,400 किलोमीटर है। पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो रही है।

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