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लद्दाख को मिलेगा नगालैंड और मिजोरम जैसा दर्जा, बैठक के बाद केंद्र का फैसला; क्या है अनुच्छेद 371(K)?

जम्मू। केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार ने बुधवार को मीटिंग का आयोजन किया। इस बैठक में लद्दाख को अतिरिक्त सुरक्षा देने के लिए अनुच्छेद 371 (K) जैसा संवैधानिक प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है।

बैठक को लेकर केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने कहा कि कल गृह मंत्रालय में उप-समिति की एक बैठक हुई। इस मीटिंग में लद्दाख की एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के नेताओं ने हिस्सा लिया।

आशीष कुंद्रा ने कहा कि यह बैठक पिछली बैठक में हुई चर्चा को आगे बढ़ाते हुए लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपाय करने पर केंद्रित रही। खासकर स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए अनुच्छेद 371 के तहत एक विशेष प्रावधान को शामिल करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि हम केंद्र शासित प्रदेश स्तर की एक ऐसी संस्था बनाने के फैसले की ओर बढ़ रहे हैं, जिसके सदस्य सीधे चुनाव क्षेत्रों से चुने जाएंगे और जिसे विधायी और वित्तीय शक्तियां प्राप्त होंगी। अगली बैठक अक्टूबर में होनी है और हमें उम्मीद है कि तब तक संवैधानिक संशोधन विधेयक का एक विस्तृत मसौदा तैयार हो जाएगा।

नए प्रावधान में क्या होगा?

इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक सीधे चुने गए गवर्निंग बॉडी का प्रावधान किया जाएगा। इसके अंतर्गत यहां के लोगों को कुछ सुरक्षा उपाए दिए जाएंगे। लद्दाख के लोगों की जमीन, उनके प्राकृतिक संसाधन, उनकी संस्कृति और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही विधायी शक्तियों पर भी जोर दिया गया।

यूटी-बेस्ड कमेटी का होगा गठन

आशीष कुंद्रा ने बताया कि लद्दाख के संवैधानिक सुरक्षा उपायों के लिए एक यूटी लेवल बॉडी का गठन किया जाएगा, जिसके प्रत्यक्ष रूप से चुनाव होंगे। इसमें विधायिका, कार्यपालिका और वित्तीय शक्तियां निहित होंगी।

इस बॉडी के गठन की प्रक्रिया संसदीय रहेगी। इसमें दो तिहाई बहुमत चाहिए होते हैं। संवैधानिक संशोधन बिल के बाद एक कानून भी लाया जाएगा। जिसके तहत इस बॉडी की शक्तियां कैसे रेग्यूलेट होंगी। वह प्रक्रिया शामिल रहेगी।

अनुच्छेद 371 (K) क्या है?

आशीष कुंद्रा ने अनुच्छेद 371 में एक विशेष प्रावधान जोड़ने की बात कही है। अनुच्छेद 371 राज्यों की अनूठी सांस्कृतिक-भाषाई और सामाजिक पहचान की रक्षा करता है। आर्टिकल 371 के तहत A से लेकर J तक सब-क्लॉज जुड़े हुए हैं, जो राज्यों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करते हैं।

उदाहरण के लिए आर्टिकल 371 महाराष्ट्र और गुजरात के लिए लागू होता है। आर्टिकल 371 (A) नागा लोगों के धार्मिक-सामाजिक और पंरपरों में संसद के हस्तक्षेप पर रोक लगाता है। यानी ऐसे फैसलों पर सिर्फ वहां की विधायिका का ही अधिकार है। आर्टिकल 371 (B) असम के जनजातीय क्षेत्रों की देखभाल करता है।

आर्टिकल 371 (C) पहाड़ी क्षेत्रों के प्रशासन और विकास के लिए विशेष विधानसभा समिति बनाने का हक देता है। आर्टिकल 370 (D और E) आंध्रा प्रदेश और तेलंगाना के स्थानीय निवासियों के लिए नौकरियों और शिक्षा में समान अवसर प्रदान कराता है।

आर्टिकल 371 (F) सिक्किम को विशेष अधिकार देता है। आर्टिकल 371 (G) मिजोरम में भूमि और रीति-रिवाज में संसदीय कानूनों के सीधे प्रयोग पर रोक लगाता है, आर्टिकल 371 (H) गोवा के लिए कम से कम 30 सीटों का प्रावधान करता है। वहीं, आर्टिकल 371 (J) कर्नाटक के लिए है और अब लद्दाख के लिए अगला प्रावधान जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।

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