Headlines

लद्दाख की चोटियां बनेंगी जनरल जोरावर की वीरता का प्रतीक, चीन तक डोगरा परचम लहराने वाले शूरवीर को नमन

जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख व नियंत्रण रेखा के पार भारतीय क्षेत्रों में चोटियों, झीलों, स्थानों को दिए गए नाम बौद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ देश की सीमाओं को चीन तक पहुंचाने वाले जनरल जोरावर सिंह की वीरता का प्रयाय बनेगी।

डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह की फौज के सबसे काबिल जनरल जोरावर सिंह ने वर्ष जोरावर सिंह ने वर्ष 1834 से 1841 के बीच छह बार लद्दाख क्षेत्र में प्रवेश कर लद्दाख, बाल्टिस्तान, तिब्बत पर डोगरा परचम लहराया था। उन्होंने 1841 में पश्चिमी तिब्बत पर हमला कर जम्मू-कश्मीर की सीमाओं को चीन में स्थित कैलाश पर्वत, मानसरोवर झील तक पहुंचा दिया था।

वहां पर उन्होंने चीनी सैनिकों को मात देकर उनका झंडा साथ लाया था। यह मानतलाई फ्लैग सेना की जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय राइफल्स की शान है। जीत के बाद लौट रहे जोरावार सिंह से रास्ते में छिपे तिब्बती सैनिकों के हमले में घायल होने के बाद 12 दिसंबर, 1841 को वीरगति पाई थी।

जनरल जोरावर की वीरता के साथ लद्दाख में चोटियों को दिए गए नाम क्षेत्र की स्मृद्ध बौद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक होंगे। लद्दाख में मिलारेपा चोटी उस बौद्ध भिक्षु को समर्पित है जिसे कैलाश पर्वत पर चढ़ाई करने वाला इकलौता व्यक्ति माना जाता है। ऐसा कह जाता है कि कैलाश मानसरोवर के पास स्थित उंचे कैलाश पर्वत पर भगवान शिव का वास है, वहां कोई नही जा सकता है। जो भी वहां गया, वापस नही आया।

लेकिन यह गाथा बौद्ध संस्कृति का हिस्सा है कि केवल मिलारेपा है इकलौते व्यक्ति हैं जो अपनी शक्तियों के बल पर कैलाश पर्वत पर चढ़ाई करने के बाद लौट आए थे। वहीं, लद्दाख की रिनचन जांगपो चोटी उस महान धर्मगुरू को समर्पित हैं जिन्होंने सदियों पहले संस्कृत में लिखे बौद्ध ग्रंथों का तिब्बती भाषा में अनुवाद कर तिब्बत व लद्दाख में बौद्ध धर्म के प्रचार में मुख्य भूमिका निभाई थी। वह प्रसिद्ध भारतीय गुरू अतीशा के शिष्य थे। कहा जाता है कि रिनचन जांगपो ने पश्चिमी तिब्बत में सौ से अधिक बौद्ध मठों का निमार्ण करवाया था।

गुरु रिनपोछे झील गुरू रिनपोछे को समर्पित है। उन्होंने आठवीं शताब्दी में तिब्बत में बजरायन बुद्धिस्म लाया था। उन्होंने दूसरा बुद्ध भी कहा जाता है। शाक्यश्री गिरि ने बुद्धिस्म के प्रचार में योगदान दिया है। वहीं, मार्पा लोत्सवा री एक तिब्बतन धर्म गुरू थे जिन्होंने ग्याहवीं शताब्दी में भारत से कई वजरायन ग्रंथो को तिब्बत तक पहुंचाकर बौद्ध धर्म का प्रचार, प्रसार किया था। इनके साथ लद्दाख की कई चोटियों को हिमालय में वास करने वाले भगवान शिव के नाम भी किया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *