
जम्मू। सिंधु नदी में मिलकर व्यर्थ बहने वाला ग्लेशियरों का 9 करोड़ लीटर पानी अब लद्दाख में बंजर भूमि को सीज रहा है। लद्दाख के 12 गांवों तक पहुंचने वाला यह पानी एक हजार एकड़ से अधिक बंजर भूमि को हरा भरा बनाएगा। लद्दाख में जल व कृषि सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की पहल के तहत उठाए गए महत्वपूर्ण कदम से लेह जिले के स्टोक गांव के नाले में बहने वाले पानी का रुख मोड़ दिया गया है।
सिंधु नदी में मिलने वाले इस नाले के 90 मिलियन लीटर यानी 9 करोड़ लीटर ग्लेशियर के पानी को हर रोज सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। इगू-पेह सिंचाई नहर से 12 गांवों तक पहुंचाया जा रहा है।
इस पहल की खास बात यह है कि ग्लेशियर के पानी को नहर तक पहुंचाने के लिए साधारण अर्थवर्क व दो ट्रेंच बनाए गए हैं। इसके लिए जेसीबी का इस्तेमाल किया गया व किसी बड़े पूंजीगत व्यय की आवश्यकता नहीं पड़ी। उपराज्यपाल के निर्देश पर 14 अगस्त को सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने स्टोक नाला के मुख्य जल प्रवाह से अतिरिक्त पानी को इगू-पेह नहर की ओर मोड़ने का काम सफलतापूर्वक पूरा किया।
26 क्यूसेक पानी इगू-पेह नहर में पहुंचाया
प्रशासन के अनुसार स्टोक नाला में पानी का प्रवाह करीब 36.60 क्यूसेक आंका गया। इसमें से करीब 26 क्यूसेक पानी दो अलग-अलग डायवर्जन के माध्यम से इगू-पेह नहर में पहुंचाया गया है। इनमें 19 क्यूसेक इगू गांव की ओर व 7 क्यूसेक पेह गांव की ओर मोड़ा गया है। पीछे बचे करीब 10 क्यूसेक पानी के उपयोग की योजना पर भी इस समय काम चल रहा है। प्रशासन के इस प्रयास से नहर में पानी की उपलब्धता 50 से बढ़कर 80 क्यूसेक के करीब हो गई है।
दशकों से बेकार बह रहा था स्टोक नाला
करीब 43 किलोमीटर लंबी इगू-पेह नहर का निर्माण वर्ष 1979 में शुरू होकर 2005 में पूरा हुआ था। नहर के निर्माण के दौरान करीब 200 मीटर हिस्सा भूमिगत बनाया गया था, ताकि स्टोक नाला का पानी नहर के ऊपर से गुजर सके व नहर के प्रवाह में बाधा न आए।
दशकों तक स्टोक नाला से बहने वाले पानी का सिंचाई के लिए उपयोग नहीं किया गया। पानी की कमी के कारण इगू-पेह नहर में भी पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं रहता था।
सभी गांवों को नियमित आधार पर पानी उपलब्ध कराना लक्ष्य
अब स्टोक नाला से अतिरिक्त पानी मिलने के बाद इगू-पेह नहर में जल प्रवाह बढ़ गया है। क्षेत्र में पहले पानी की कमी के कारण 12 गांवों को रोस्टर के आधार पर सीमित जल आपूर्ति की जाती थी। अब प्रशासन का लक्ष्य सभी गांवों को नियमित आधार पर पानी उपलब्ध कराना है। इससे किसानों की आय व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।
प्रशासन का कहना है कि नियमित सिंचाई उपलब्ध होने से हजारों एकड़ कृषि भूमि को लाभ मिलेगा। इससे फसल उत्पादन और फसल तीव्रता बढ़ने के साथ किसानों की आय में वृद्धि, रोजगार के अवसरों का विस्तार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
आत्मनिर्भर लद्दाख की ओर कदम
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि रोजाना 9 करोड़ लीटर ग्लेशियर पानी को बचाकर इगू-पेह व योक्यूर नहरों की ओर मोड़ना लद्दाख जैसे ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर टिकाउ जल प्रबंधन की व्यवहारिकता को साबित करता है।
उन्होंने कहा कि यह हरित, जल-सुरक्षित व आत्मनिर्भर लद्दाख के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशासन का उद्देश्य ग्लेशियर और बर्फ पिघलने से मिलने वाली जलधारा की हर बूंद का सिंचाई और अन्य उत्पादक कार्यों में उपयोग सुनिश्चित करना है।
जल प्रबंधन का माडल है स्टोक नाला
स्टोक नाला में मिली सफलता को प्रशासन ने पूरे लद्दाख में जल प्रबंधन के लिए एक माडल के रूप में देखा है। इगू-पेह नहर प्रणाली के आसपास कई अन्य जलधाराओं की पहचान की गई है, जहां इसी तरह के हस्तक्षेप की योजना बनाई जा रही है। इनमें माथो नाला, तुचिक चेनमो नाला, तुचिक चोन नाला व स्टकना नाला शामिल हैं।
प्रस्तावित परियोजनाओं में कम लागत वाली, गुरुत्वाकर्षण आधारित इंजीनियरिंग, न्यूनतम जल अपव्यय व पर्यावरणीय स्थिरता को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि बिखरे हुए ग्लेशियर जल प्रवाह को मौजूदा सिंचाई ढांचे से जोड़कर लद्दाख के कृषि क्षेत्रों में नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है।
