
जम्मू। ग्रीन हाइड्रोजन के साथ अब लद्दाख भूतापीय ऊर्जा (जियोथर्मल एनर्जी) का केंद्र बनने की अग्रसर है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख के पुगा में भारत के पहले और सबसे गहरे जियोथर्मल कुओं का लोकार्पण किया।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ओएनजीसी लद्दाख में भूतापीय ऊर्जा आधारित एक मेगावाट की पायलट परियोजना पर कार्य कर रहा है। यह हरित और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में देश का एक ओर निर्णायक कदम माना जा रहा है।
उपराज्यपाल सक्सेना ने कहा कि यह परियोजना लद्दाख की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी। हमारी इंजीनियरिंग टीमों ने खराब मौसम और मुश्किल जमीन के नीचे की स्थितियों का सामना करते हुए रिकॉर्ड समय में कुओं की ड्रिलिंग पूरी की। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्बन-न्यूट्रल लद्दाख के विजन और नेट-ज़ीरो इंडिया के लक्ष्य के करीब ले जाएगी।
14 हजार फीट की ऊंचाई पर बनाए कुएं
लद्दाख में समुद्र तल से 14 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर एक-एक हजार मीटर गहरे दोनों जियो थर्मल कुएं शुरू होने से लद्दाख को स्वच्छ एवं वैकल्पिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा हैं।
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, अत्यधिक ठंड, दुर्गम इलाके व सीमित कार्य अवधि के बावजूद पहला जियोथर्मल कुआं 22 मई को पूरा किया गया। दूसरा कुआं खोदने का काम पुगा वेली में तीन जून को शुरू हुआ।
आठ जुलाई को रिकार्ड समय में दूसरे कुएं को 1,000 मीटर की गहराई तक सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। उपराज्यपाल सक्सेना ने लद्दाख की जिम्मेदारी संभालने के बाद इस प्रोजेक्ट को पटरी पर लाने का काम शुरू कर दिया था।
उनके प्रयासों के कारण जून में त्रिपक्षीय समझौते को पांच वर्षों के लिए नवीनीकृत किया था। उसके साथ ही प्रोजेक्ट को पूरा करने के कार्य ने फिर से गति पकड़ ली थी।
400 मीटर की गहराई पर 135 डिग्री तापमान
देश की महत्वकांक्षी परियोजना के इंजीनियरों के अनुसार, जियोथर्मल कुओं में 400 मीटर की गहराई पर 135 डिग्री तापमान दर्ज किया है। अभी आगे कार्य जारी है और अपेक्षा है कि इससे भी अधिक तापमान दर्ज किया जाएगा।
24 घंटे मिलेगी बिजली
बता दें कि जियोथर्मल एनर्जी से पृथ्वी की ऊष्मा का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह लगातार, बिना रुकावट दिन में 24 घंटे और साल में 365 दिन बिजली बना सकती है। जबकि सोलर प्लांट रात में काम नहीं करते हैं और पन बिजली परियोजनाओं को खास हवा की स्पीड की जरूरत होती है, लेकिन धरती की कुदरती अंदरूनी गर्मी से चलने वाले जियोथर्मल प्लांट पूरे साल 24 घंटे चालू रह सकते हैं।
