लश्कर से जुड़े आतंकी संगठन ने दी कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को निशाना बनाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

जम्मू। जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी हिंदू सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक छद्म (शैडो) आतंकी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल ने एक नया धमकी भरा पत्र जारी कर कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है।

संगठन ने कश्मीर और जम्मू दोनो ही जगहों पर हमलों की चेतावनी दी है। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और इस धमकी भरे पत्र की जांच में जुट गई हैं।

भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार, यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल लश्कर-ए-तैयबा का ही एक शैडो फ्रंट है। इस संगठन ने एक दस्तावेज जारी किया है, जिसे एक प्रकार से कश्मीरी हिंइू कर्मचारियों की हिट लिस्ट माना जा रहा है। इसमें विशेष रूप से प्रधानमंत्री पैकेज के तहत तहत कार्यरत छह कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर सार्वजनिक किए गए हैं।

आतंकी संगठन ने जारी कियो नोट

खुफिया सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों के निजी विवरण सार्वजनिक करने के पीछे का मुख्य मकसद उनमें भय पैदा करना और लक्षित हमलों के लिए उनकी पहचान उजागर करना है। आतंकी संगठन ने धमकी भरे नोट में स्पष्ट किया है कि वे सरकारी विभागों, विशेषकर राजस्व विभाग पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जहां ये कर्मचारी तैनात हैं।

धमकी भरे पत्र में कश्मीर घाटी और जम्मू, दोनों ही स्थानों पर हमले करने की बात कही गई है। संगठन ने कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे कश्मीर घाटी से जम्मू चले भी जाते हैं, तो वे पूरी तरह सुरक्षित नहीं होंगे। धमकी में कहा गया है कि उन्हें कश्मीर के बाहर भी निशाना बनाया जा सकता है।

संगठन ने प्रवासी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए दी जा रही प्रशासनिक सुविधाओं का भी विरोध किया है। इनमें घर से काम करने और दूर रहकर काम करने जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। संगठन ने ऐसी सुविधाएं जारी रखने पर भी धमकी दी है।

कड़े जवाबी हमले करने की धमकी दी

संगठन ने उपराज्यपाल, पुलिस महानिदेशक और दिल्ली में मौजूद अधिकारियों को भी चेतावनी दी है।नोट के एक अन्य हिस्से में स्थानीय पुलिस को लेकर भी धमकी दी गई है। इसमें दावा किया गया है कि 90 प्रतिशत से अधिक स्थानीय पुलिसकर्मी स्थानीय इलाकों में ही रहते और आते-जाते हैं।

संगठन ने इसी आधार पर पुलिसकर्मियों पर कहीं भी और कभी भी हमले का खतरा बताया है।इसके साथ ही संगठन ने सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन द्वारा आतंकवादियों व उनके समर्थकों की संपत्तियों को कुर्क या जब्त करने की कार्रवाई के खिलाफ भी तत्काल और कड़े जवाबी हमले करने की धमकी दी है।

फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस धमकी के बाद सतर्क हो गई हैं। सुरक्षा एजेंसियां इसमें जारी की गई व्यक्तिगत जानकारियों की गंभीरता से जांच कर रही हैं। अधिकारियों की सुरक्षा और संवेदनशील सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई है। हिंदू कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ा दी है। उनके रहने की जगहों के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है।

एक सोची समझी रणनति

खुफिया एजेंसियां इसे आतंकी संगठनों की एक सोची समझी रणनीति मान रही है। कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर सार्वजनिक कर उन्हें डराया जा रहा है।ऐसा कर कश्मीरी हिंदू परिवारों को वापस कश्मीर मेंं लौटने से रोकना भी सजिश एक हिस्सा हो सकता है। पिछले कुछ वर्ष से सरकारी कश्मीरी हिंदूओं को वापस घाटी में बसाने के प्रयास कर रही है।

कब-कब हुए कश्मीरी हिंदू कर्मचारी पर हमले

  • अक्टूबर 2021: श्रीनगर के सफाकदल इलाके में एक सरकारी स्कूल के भीतर घुसकर आतंकियों ने पहचान पत्र देखने के बाद कश्मीरी हिंदू शिक्षक दीपक चंद और सिख प्रिंसिपल सुपिंदर कौर की बेरहमी से हत्या कर दी थी
  • 12 मई, 2022 : बड़गाम जिले के चडूरा स्थित तहसीलदार कार्यालय के भीतर घुसकर पीएम पैकेज कर्मचारी राहुल भट की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
  • 31 मई 2022: कुलगाम के गोपालपोरा में कश्मीरी हिंदू शिक्षिका रजनी बाला की उनके स्कूल परिसर के बाहर आतंकियों ने सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी।
  • अक्टूबर 2022: शोपियां जिले के चौधरीगुंड में कश्मीरी हिंदू पूरन कृष्ण भट की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई।
  • 26 फरवरी 2023: पुलवामा के अचन इलाके में एक बैंक में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत कश्मीरी हिंदू संजय शर्मा की आतंकियों ने बाजार जाते समय हत्या कर दी थी।

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