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लद्दाख में फिर गरजीं तोपें, दुश्मनों को दिया स्पष्ट संदेश; सेना का ‘अग्नेयास्त्र-4’ अभ्यास

जम्मू। भारतीय सेना भावी युद्दों के लिए तैयार है। सीमा पार से शरारत हुई तो अग्निअस्त्रों से समन्वित प्रहार होंगे। लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गरजी भारतीय सेना की तोपों ने दुश्मन को यह संदेश दिया।

पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर के गनर्स ने आर्टिलरी व इंडो तिब्बतन बार्डर पुलिस के जवानों के साथ अग्नेयास्त्र-4 युद्ध अभ्यास में अपनी आपरेशनल तैयारियों को धार दी। रात के अंधेरे में सेना के गनर्स की तोपों ने अपने लक्ष्य को भेद कर पैदल सैनिकों व आइटीबीपी के जवानों को आगे बढ़कर दुश्मन पर त्वरित प्रहार करने के लिए अवसर दिया।

परिचालन क्षमताओं का प्रदर्शन

अभ्यास के दौरान सेना, सुरक्षा बलों के बीच निर्बाध संयुक्त संचालन सामरिक समन्वय व एकीकृत फायरपावर का प्रदर्शन हुआ। उच्चतम इलाकों में युद्धक्षेत्र में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सेना, सुरक्षाकर्मियों ने आपसी तालमेल के साथ परिचालन क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

युद्ध अभ्यास का उद्देश्य चुनौतीपूर्ण भौगोलिक व मौसम संबंधी परिस्थितियों में संयुक्त अभियानों की प्रभावशीलता को परखना व विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वय को और मजबूत करना था। इस दौरान तोपखाना, पैदल सेना व आइटीबीपी बीच बेहतर तालमेल व युद्धक परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता को परखा गया।

 दुश्मन पर प्रहार करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षण

पूर्वी लद्दाख में गलवन के बाद सशस्त्र सेनाओं एकिकृत युद्ध काैशल के लिए तैयारी कर रही हैं। भावी युद्धों में बिना समय गवाए सशस्त्र सेनाएं दुश्मन पर संयुक्त प्रहार करेंगे। ऐसे में लगातार होने वाले युद्ध अभ्यासों से सैनिक आपात हालात का सामना करने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं।

सेना के बेड़े में आधुनिक हथियारों, तकनीकों काे शामिल करने के साथ पैदल सेना के जवानों को ड्रोन से निगरानी व दुश्मन पर प्रहार करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है।

चुनौतियों का सामना करने के लिए सैन्य इकाइयों की लगातार तैयारियों पर के वरिष्ठ अधिकारी निरंतर नजर रखे हुए हैं। सेना की उत्तरी कमान के आर्मी कमांडर के साथ सभी कोर कमांडर अग्रिम इलाकों के दौरे कर न सिर्फ आपरेशनल तैयारियों को तेजी देते हैं, अपितु वे कठिन हालात में देश की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे सैनिकों का मनोबल भी उंचा रखते हैं।

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