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LAC पर चीन को उसी की भाषा में जवाब देंगे भारतीय सैनिक, लेह में मंदारिन सीख रहे जवान; JNU एक्सपर्ट दे रहे ट्रेनिंग

जम्मू। विस्तारवादी चीन के सैनिकों ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कोई दुस्साहस किया तो उन्हें भारतीय सैनिकों से मंदारिन भाषा में हद में रहने की कड़ी चेतावनी मिलेगी। पूर्वी लद्दाख में चीन के सामने किसी भी प्रकार के हालात का सामना करने के लिए तैयार रहने वाले सैन्यकर्मी लेह में मंदारिन भाषा सीख रहे हैं। शुक्रवार को लेह में सेना की फायर एंड फ्यूरी काेर की तीन दिवसीय मंदारिन भाषा कार्यशाला शुरू हो गई।

कार्यशाला का उद्देश्य प्रशिक्षित सैन्य कर्मियों की मंदारिन भाषा सुनने व बोलने की दक्षता को और बेहतर बनाना है। लेह में आयोजित की जा रही इस कार्यशाला का संचालन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फार चाइनीज एंड साउथईस्ट एशियन स्टडीज के विशेषज्ञ प्रो बीआर दीपक व दयावंती कर रही हैं।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों की भाषा संबंधी क्षमताओं को निखारने के साथ-साथ व्यावहारिक संवाद कौशल पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य कर्मियों की भाषाई दक्षता को मजबूत करने के साथ उनकी पेशेवर क्षमता में वृद्धि करना है।

चीनी भाषा की समझ से LAC पर बेहतर होगी निगरानी

लद्दाख में वास्त्विक नियंत्रण रेखा पर निगरानी के स्तर को और बेहतर बनाने के लिए भारतीय सेना के जवानों व अधिकारियों के लिए मंदारिन भाषा को बेहतर ज्ञान समय की मांग है। पहले सैनिकों को चीनी भाषा पूरी तरह से समक्ष न आने से दिक्कतें होती थी।

शुक्रवार को कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर के अधिकारियों ने चीनी भाषा पर हो रही इस कार्यशाला को सैन्यकर्मियों के लिए अहम करार दिया।

गलवन के बाद मंदारिन प्रशिक्षण पर बढ़ा जोर

गलवन घाटी में 2020 की खूनी झड़प के बाद से समय समय पर भारतीय सैन्य कर्मियों के लिए मंदारिन भाषा सीखने के कार्यक्रम हो रहे हैं। पिछले छह सालों में पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना पड़ौसी देश की किसी भी प्रकार की साजिश का सामना करने के लिए सशक्त हुई है। सेना के आधुनिकीकरण, बुनियादी ढांचे के विकास के साथ बेहतर तरीके से निगरानी व संवाद करने के लिए विशेष प्रयास हो रहे हैं।

पड़ोसी के रेडियो संदेश समझने में भी मददगार मंदारिन

इसी के चलते सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर ने अपने सैन्य कर्मियों को मंदारिन भाषा में दक्ष करने के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय व अन्य कई विश्व विद्यालयों के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। पिछले कुछ सालों में मंदारिन भाषा बोलने में दक्ष सैन्य कर्मियों को नियंत्रण रेखा पर तैनात किया गया है। समय समय पर इंटरसेप्ट होने वाले पड़ौसी के रेडियो संंदेशों को समझने के लिए भी मंदारिन काम आ रही है।

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