
POJK में जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान को PoJK में सुरक्षा बलों की नई तैनाती के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है। कमेटी का कहना है कि ऐसा कोई भी कदम उठाए जाने पर उसे इस इलाके पर “बाहरी हमला” माना जाएगा।
एक्शन कमेटी के नेता उमर नज़ीर कश्मीरी ने दावा किया कि कुछ पाकिस्तानी फ़ौजें कोटली और इलाके के दूसरे हिस्सों से पीछे हट गई थीं। उन्होंने चेतावनी दी कि उन्हें दोबारा तैनात करने की किसी भी कोशिश से ज़बरदस्त विरोध हो सकता है।
कश्मीरी ने कहा, “कुछ फ़ौजें कोटली और दूसरे इलाकों से पीछे हट गई हैं।” उन्होंने आगे कहा, “अगर फ़ौज को यहाँ दोबारा लाया जाता है – चाहे वे कहीं से भी आएँ – तो हम इसे अपने राज्य पर बाहरी हमला मानेंगे और इसकी कड़ी निंदा और विरोध करेंगे।”
कश्मीरी ने यह भी कहा कि कमेटी इलाके में सुरक्षा बलों के आने का विरोध करेगी, चाहे उन्हें कहीं से भी तैनात किया जाए। उन्होंने कहा, “किसी भी जगह से, किसी भी ज़िले से और किसी भी तरह की फ़ौज को किसी भी हालत में हमारे कश्मीर में घुसने नहीं दिया जाना चाहिए।”
PoJK एक्शन कमेटी किस बात का विरोध कर रही है?
यह चेतावनी PoJK में महीनों से चल रही अशांति के बीच आई है, जहाँ JAAC ने कई आर्थिक, राजनीतिक और संवैधानिक माँगों को लेकर विरोध प्रदर्शनों और शटडाउन का नेतृत्व किया है।
जून से विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गए और मुज़फ़्फ़राबाद, रावलकोट, मीरपुर और कोटली जैसे इलाकों में प्रदर्शनों की खबरें आईं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों की भी खबरें हैं, और हिंसा व हताहतों के बारे में अधिकारियों और प्रदर्शनकारी नेताओं के अलग-अलग दावे हैं।
इसके बाद वहां की कठपुतली तथाकथित सरकार ने JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया और उसके कुछ नेताओं के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। अधिकारियों ने समूह पर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है, जिन आरोपों का आंदोलन ने खंडन किया है।
कश्मीरी की ताज़ा चेतावनी यह संकेत देती है कि जिन इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं, वहाँ सुरक्षा बलों की नई तैनाती का आंदोलन के भीतर लगातार विरोध हो रहा है।
