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POJK Protest : POJK में जारी आंदोलन अब LOC के करीब पहुंच गया, आंदोलन के 115 वें दिन मंधोल के इलाके में जुटे 25000 लोगों ने पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ नारे लगाए.

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुंछ-मेंढर रास्ता खोलने और LOC की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए.

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POJK) में जारी आंदोलन अब नियंत्रण रेखा LOC के करीब पहुंच गया है. मंधोल इलाके में आयोजित एक सभा में हजारों लोग जुटे हुए हैं. आयोजकों और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक करीब 25 हजार लोगों की भीड़ जुटी हुई हैं. मंधोल LOC से करीब 7 किलोमीटर दूर है. प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ नारे लगाए और भारत की ओर जाने वाली पुंछ-मेंढर रास्ते को खोलने की मांग कर रहे हैं.

आर-पार की लड़ाई का ऐलान

  • जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी प्रमुख भूमिका निभा रही है. संगठन लंबे समय से POK में बिजली की कीमत, जरूरी सामान की कीमत, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और शासन से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहा है.
  • प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ने प्रदर्शन के कारण सरकार ने पीओके की सप्लाई लाइन को काट दिया है. जिसके कारण लोगों को दिक्कत हो रही है. लोगों के पास आटा और खाने का सामान नहीं है. 5 जून से पीओके में जारी आंदोलन के
  • 5 जून से शुरू हुए इस आंदोलन के दौरान कई इलाकों में प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ तनाव की खबरें सामने आई हैं. लेकिन सोमवार को 115 वें दिन मंधोल के इलाके में खासी गहमागहमी देखी गई.
  • मंधोल की सभा में जेएएसी से जुड़े नेता सरदार अमान खान ने एलओसी को लेकर भीड़ के सामने पाकिस्तान सरकार और सेना को लेकर सवाल उठाया और उन्होंने पुंछ और मेंढर की तरफ जाने वाले रास्ते को खोलने और एलओसी की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की मांग की. इस दौरान प्रदर्शनकारियों में शामिल कई लोगों ने भारत के साथ जुड़ने की इच्छा जताई हैं.

पीओजेके में क्या है राजनीतिक स्थिति ?

  • जानकारी के लिए बता दें कि जारी आंदोलन और लोगों के विरोध के बावजूद POJK में चुनाव हुए. चुनाव कई चरणों में कराए गए और पहले चरण में 27 जुलाई को मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान हुआ.
  • बाद के चरणों में दूसरे इलाकों में मतदान हुआ. पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने चुनाव में मजबूत प्रदर्शन किया और इफ्तिखार गिलानी पीओजेके के प्रधानमंत्री बने.
  • फिलहाल मंधोल में जुटी भीड़ ने आंदोलन को एलओसी के करीब पहुंचाकर इसे नया राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दा बना दिया है. आगे हालात किस दिशा में जाएंगे, यह प्रदर्शनकारियों की अगली रणनीति और पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा.

मुनीर के सामने पीओके की चुनौती, आगे क्या होगा?

  • पीओजेके में बढ़ता असंतोष अब पाकिस्तान की सत्ता और सेना के लिए बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है. आंदोलन के दबाव के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि पाकिस्तान की सेना हालात को नियंत्रित करने के लिए किस हद तक हस्तक्षेप करेगी.
  • दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय अधिकारों से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण हैं. अगर मौजूदा आंदोलन लगातार मजबूत होता है और स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ती है, तो पीओजेके की राजनीतिक स्थिति पर बहस और तेज हो सकती है. 

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