
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बुधवार को विधायकों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी के बिल वापस लेने को लेकर नेशनल कान्फ्रेंस और भाजपा विधायक आमने-सामने आ गए। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और सत्ता पक्ष तथा विपक्षी बेंचों से एक-दूसरे पर सवाल उठाए गए। सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस के विधायकों ने भाजपा पर दोगला रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वेतन बढ़ाने के प्रस्ताव पर भाजपा के सभी सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं।
विधानसभा में स्पीकर ने जैसे ही अपना आसन ग्रहण किया, सत्ताधानी नेशनल कान्फ्रेंस के विधायक अल्ताफ अहमद वानी उर्फ अलताप कालू अपनी सीट पर खड़े हो गए। उन्होंने स्पीकर का ध्यान अपनी तरफ दिलाते हुए कुछ कागज हवा में लहराए और दावा किया यह वह कागज हैं, जिन पर वेतन बढ़ाने का समर्थन करते हुए भाजपा विधायकों ने हस्ताक्षर किए हैं।
गत मंगलवार को यह यहां ड्रामा कर रहे थे और कह रहे थे कि बिल वापस लो। हमारे मुख्यमंत्री ने बिल को रिजेक्ट कर दिया।
उनकी बात सुनते ही भाजपा विधायक अपने सीटों पर खड़े हो गए और दोनों तरफ से आरोप -प्रत्यारोप शुरु हो गए।
‘आप झूठ बोल रहे हैं’
स्पीकर ने दोनों पक्षों को शांत करने का प्रयास किया, इसी दौरान भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा की जोरदार आवाज गूंजी। उन्होंने सत्तापक्ष के विधायकों को इस मुद्दे पर सदन में राजनीति न करने की सलाह देते हुए कहा कि आप झूठ बोल रहे हैं, बिल रिेजेक्ट नहीं हुआ है,सरकार ने वापस लिया है।
हम लोगों का कहना है कि सरकार यहां पहले आम आदमी के मसले हल करे, डेलीवेजरों की तनखाह और सेवानियमतिकरण का मसला हल करे,लेकिन सरकार पहले यहां विधायकों का वेतन बढ़ा रही थी, जिस पर हमें एतराज है।
वेतन मुद्दे पर सदन में तीखी बहस
अल्ताफ अहमद वानी ने कहा कि हमे पता है कि आप क्या चाहते हैं, पहले वेतन बढ़ाने की बात करते हैं और लोगों में अच्छा दिखने के लए अब इसका विरोध कर रहे थे। इस पर शाम लाल शर्मा ने उन्हें अंग्रेजी मं कहा कि डोंट डू पालिटिक्स आन द फ्लोर आफ हाउस। हम यहां लोगों की सेवा और नुमायंदगी के लिए आए हैं। यहां लोगों की सेवा के नाम पर ड्रामा क्यों कर रहे हैं।
‘सब छोड़ कोई प्राइवेट जॉब करो’
उन्होंने अंग्रेजी में कहा कि इफ यू आर हियर फार पे, डू एन अदर प्राइवेट जॉब, अगर आप यहां वेतन भत्तो के लिए आए हैं तो फिर यह सब छोड़ कोई दूसरा काम करो। शर्मा की इस टिप्पणी के बाद सदन का माहौल और गरमा गया। सत्ता पक्ष और विपक्षी बेंचों के बीच तीखी नोकझोंक जारी रही।
वेतन बढ़ोतरी बिल को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते विधायकों के वेतन बनाम कर्मचारियों की लंबित मांगों के मुद्दे में बदल गया। स्पीकर ने दोनों पक्षों को प्रश्नकाल का हवाला देते हुए शांत किया।
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