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लद्दाख में पहली बार रायसीना फोरम, 39 देशों के राजनयिक पहुंचे थिकसे मठ; लिलियम के खेतों ने खींचा ध्यान

जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में पहली बार हुए रायसीना फोरम फार फ्यूचर आफ डिप्लोमेसी सम्मेलन के प्रतिनिधि रविवार को लद्दाख की आध्यात्मिक विरासत, प्राचीन इतिहास, नवाचार से रूबरू हुए। प्रतिनिधियों ने पुराने लेह शहर, थिक्से मठ के साथ जिले के कई हिस्सों का दौरा कर हिमालयी प्रदेश की खूबसूरती को करीब से देखा। उन्होंने लद्दाख के लेह में विकसित किए जा रहे लिलियम फूलों के खेतों की खूबूसरती का नजारा लिया।

साथ ही भारत के पहले पेट्रोग्लिफ पार्क में चट्टानों पर उकेरे गए प्राचीन चित्रों व निशानों के माध्यम से लद्दाख के हजारों वर्ष पुराने इतिहास व इस क्षेत्र में रहने वाली पुरानी सभ्यताओं व समुदायों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

लद्दाख में विकास की संभावनाओं और चुनौतियों पर मंथन

लेह में पहली बार हुए रायसीना फोरम फार फ्यूचर आफ डिप्लोमेसी सम्मेलन में भारत सहित विश्व के 39 देशों के राजनयिकों, नीति-निर्माताओं, कारोबारियों व रणनीतिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लेकर बदलते वैश्विक परिदृश्य, भू-राजनीतिक चुनौतियों, आर्थिक सहयोग व सीमावर्ती क्षेत्रों में सतत विकास जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन में लद्दाख में विकास को तेजी देने के अभियान के साथ कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। रविवार को प्रतिनिधियों ने जमीनी स्तर पर विकास को बढ़ावा देने के लिए किए प्रयासों के बारे में जानकारी ली।

लिलियम की खेती से रोजगार और आजीविका के नए अवसर

लेह में लिलियम फूलों के खेतों के दौरे के दौरान उन्हें उच्च हिमालयी क्षेत्र में कृषि की नई संभावनाओं व स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, आजीविका के नए अवसर देने के प्रयासों के बारे में बताया गया।

थिकसे मठ में दिखी लद्दाख की समृद्ध बौद्ध विरासत

प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले थिकसे मठ का दौरा किया। वहां उन्होंने लद्दाख की बौद्ध विरासत व प्राचीन स्थापत्य कला को करीब से देखा। प्रतिनिधियों को उन धार्मिक व सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी मिली, जिन्होंने सदियों से लद्दाख की पहचान को आकार दिया है।

कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक रात्रिभोज व मिलन समारोह के साथ हुआ। इसमें प्रतिनिधियों ने स्थानीय व्यंजनों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों व आपसी संवाद के माध्यम से लद्दाख की गर्मजोशी भरी मेजबानी का अनुभव किया। विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान व संवाद ने इस आयोजन को विशेष बनाया।

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