
जम्मू-कश्मीर के कोटे की राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हुए छह माह से भी ज्यादा समय बीत रहा है, लेकिन चुनाव में हुई क्रास वोटिंग को लेकर शुरु हुआ बवाल थम नहीं रहा है।
सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस के प्रवक्ता तनवीर सादिक ने पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती पर चुनाव में भाजपा का समर्थन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमेशा इस्लाम और सच्चाई की दुहाई देने वाली महबूबा और उनकी पार्टी के तीनों विधायक पाक कुरान पर हाथ रखकर कसम खाएं कि उन्होंने भाजपा का वोट नहीं दिया है।
गत अक्टूबर 2025 में जम्मू कश्मीर के काटे की राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव हुआ था। पीडीपी-कांग्रेस ने सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस को समर्थन का यकीन दिलाया था और उसके आधार पर उम्मीद की जा रही थी कि नेशनल कान्फ्रेंस ही चार सीटें जीतेगी। मतदान के समय कुछ विधायकों ने क्रासवोटिंग की और कुछ ने कथित तौर पर जानबूझकर अपने वोट रद करा कर भाजपा को लाभ पहुंचाया और भाजपा एक सीट जीतने में कामयाब रही।
पीडीपी और कांग्रेस ने चौथी सीट भाजपा को मिलने के लिए सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस को ही जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि वह निर्दलीय विधायकों के वोट सुनिश्चित बनाने में विफल रही है और अब हार का ठीकरा उनके पीडीपी-कांग्रेस के माथे पर फोढ़ रही है। अब खुलासा हुआ है कि पीडीपी ने मतदान के समय कोई अपना अधिकृत एजेंट नियुक्त नहीं किया था जो यह देखता कि उसके विधायक किसे वोट दे रहे हैं जबकि कांग्रेस ने सिर्फ एक ही पोलिंग एजेंट नियुक्त किया था और उक्त पोलिंग एजेंट जोकि एक विधायक था, ने किसे वोट डाला ,स्वयं उसके कोई दूसरा नहीं जानता।
पीडीपी और कांग्रेस की भूमिका राज्यसभा चुनाव को लेकर फिर से सवालों के घेरे में आ गई और और पीडीपी ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि उसके लिए पोलिंग एजेंट नियुक्त करना अनिवार्य नहीं था, क्योंकि उसका कोई उम्मीदवार चुनाव में नहीं था। अलबत्ता, नेशनल कान्फ्रेंस के प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा कि पीडीपी पहले ही दिन से भाजपा की एजेंट रही है।
पीडीपी ने ही भाजपा के साथ गठजोड़ कर उसे यहां सत्ता में लाया और फिर जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कराया। राज्यसभा चुनाव में भी पीडीपी ने भाजपा का साथ दिया। अगर पीडीपी ने 2014 में भाजपा के साथ गठजोड़ नहीं किया होता, तो आज जम्मू कश्मीर के राजनीतिक हालात अलग होते। जम्मू कश्मीर की मौजूदा दुर्दशा के लिए पीडीपी ही जिम्मेदार है।
